गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

message to the whole world


"पूरे संसार के नाम संदेश" ---------------------------- बन्दिछोड़ सतगुरूदेव रामपाल जी महाराज जी की जय आखिर क्यौं एक संत व उनके अनुयाईयो पर टूट पड़ती है पुलिस???????? आखिर क्यौं मोदी राज मे एक निर्दोष संत पर आरोप लगाये जाते हैं मगर सिद्ध नही कर पाती प्रशासन व सरकार???????????????????????????????????????? आखिर क्यौं 900 से अधिक भक्तो को जेल में डाल कर देशद्रोह का आरोप लगाया गया????????????????????????????? लगाया तो सिद्ध क्यौं नही कर पाई 16 महीने बाद भी सरकार?????????????????????? ???????????????????????????? आखिर किसके हाथ की कठपुतली है सरकार??????????????????????????????????. आखिर क्यौं आँसुगैस के गोले दाग कर मार दिये बहनें व बच्चे हरियाणा सरकार ने???? ??? ????? ??? ?? ? ??????????????. आखिर जो भी हुआ, सब के सामने हुआ!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! उत्तर को लपेटने की कोशिश सरकार द्वारा जारी है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! भ्रमित करने की (साजिश) कोशिश सरकार द्वारा जारी है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!. फिर भी सत्य उजागर है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! संसार का सबसे काला दिन जिसने संसार का इतिहास ही बदल दिया 18 Nov 2014 प्रात:10 बजकर 30 मिनट तक सब ठीक था. मगर उसके कुछ देर बाद से शुरू होकर शाम 4:00 बजे तक चलने वाली बर्बरता ने पूरे भारत व संसार को नरकता की और धकेल दिया!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!??????????? ?? ?? ?? ?? एक संत पर अत्याचार करने के कारण पुरी धरती एक बार बनने जा रही है महानरक!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! अनेक भविष्य वक्ताओ( नास्ट्रेडमस, सूरदास जयगुरूदेव, नानकजी, कबीरजी, मिस्र के पिरामिड पर अंकित भविष्य वाणी ) के अनुसार!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! एक सच्चे संत व उनके अनुयाईयो को सताया जायेगा!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! फिर इस संसार मे चारौं ओर तबाही का मंजर होगा!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! यह संसार नरक में तब्दील हो जायेगा, संसार के 1/3लोग व भारत के 1/2 लोग उस तबाही के शिकार हौगे!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! तबाही इतनी भंयकर होगी की चारौं और लाशौं के ढेर दिखाई देगे!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! समुंद्र का पानी लाल हो जायेगा!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! आपसी यूद्ध होने लगेंगे, महामारी का भयंकर प्रकोप होगा संसार में त्राहीमाम- त्राहीमाम मच जायेगी!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! इन सबको वही संत रोकने व भाग्य परिवर्तन की शक्ति रखता है. अब यदि विश्व को बरबाद होने से बचाने, सामाजिक कुरीतियो को मिटाने के लिये अपने आपको व बच्चो को सुखी बनाये रखने के लिये संतजी के अनुयाईयो की मांग " C.B.I. जाँच" को आगे बढाया जाये, नही तो संसार के बिनाश की घडी इंतजार कर रही है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! सावधान?????????????????????????????????? ?????????? ????????? ??????? ?????? फिर मत कहना किसी ने बताया नही!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! यह लेख 100 प्रतिशत सच्चा है, तथा सभी भाई-बहिनौं तक जरूर पहुचायैं जितना हो सके फोरवर्ड करैं. संसार को सबको व खुद को बचाने का यही एकमात्र यही रास्ता है!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! सत साहेब ------------------------------- 100% सफलता पाने के लिए अवश्य पढे, परमात्मा की मुफ़्त सेवा का मौका न चूकैं. फ्री पुस्तक के लिए मेरे मेसेज बौक्स में कंटैकट करें या फ्री डाउनलोड करें. Must read "GYAN GANGA" book ,available in all major languages of India also in english & urdu versions. अवश्य पढिये "ज्ञान गंगा" बुक. सभी प्रमुख भारतीय भाषाओ में और अँग्रेजी व उर्दू में भी उपलब्घ ..... GYAN GANGA ( ज्ञान गंगा) डायरेक्ट डाउनलोड लिन्क फ़ौर ईच बूक..... और जानियॆ 100% सत्य आध्यात्मिक तत्वज्ञान... Gita Tera Gyan Amrit http://www.jagatgururampalji.org/click.php?id=1 (1.85 ) देखिए साधना चैनल शाम 7:40 से 8:40

आप शिक्षित हो you are educated.


जागो और सवाल करो इन पाखंडी धर्मगुरुओं से-☄☄ जो इन बिकाऊ मीडिया चैनलो पर दिन रात पागलो की तरह सुनी सुनाई बाते भोंकते रहते है जिनकी बातो का ना कोई सार है ना सारांश। (1)पूछो इन पाखंडियो से जब द्वापर युग में वेदव्यास सहित सभी ऋषि मुनियो ने राजा परीक्षित को ये कहकर भगवत की कथा सुनाने से इनकार कर दिया था कि हम ये कथा सुनाने के अधिकारी नहीं है तो फिर इस कलयुग में तुम्हे किसने भागवत और रामायण का पाठ करने का लाइसेंस दे दिया। (2)पूछो इन पाखंडियो से जब तुम्हारे तीनो भगवान् ब्रह्मा विष्णु महेश स्वयं कह रहे है कि हमारी जन्म और मृत्यु होती है हम पूर्ण भगवान् नहीं है, तो फिर पूर्ण परमात्मा कौन है,कैसा है,कहां रहता है और कैसे मिलता है! (श्री मद् देवी भागवत देवी पुराण 6 वां अध्याय, तीसरा स्कन्द, पेज नंबर 123,) (3)पूछो इन पाखंडियो से जब भगवद् गीता जी मना कर रही है कि व्रत करने वाले, श्राद्ध निकालने वाले और देवी देवताओं की पूजा करने वालो को ना कोई सुख होता है ना ही मरने पर उनकी गति (मोक्ष) होती है। ( 6 वां अध्याय 16 वां श्लोक) (4)पूछो इन पाखंडियो से जिन 33 करोड़ देवी देवताओ को श्री लंका के राजा रावण ने अपनी कैद में डाल रखा था फिर क्यों सदियों से हमसे बेबस देवी देवता पूजवाते आ रहे हैं। (5)पूछो इन पाखंडियो से जिस स्वर्ग के राजा इंद्र ने, रावण ने स्वर्ग पर हमला करके उसे हराने पर अपनी पुत्री की शादी रावण के बेटे मेघनाथ से करके अपने प्राणों की रक्षा की। फिर किसलिए हमें मारने के बाद स्वर्ग भेजने की बात करते हैं। (6)पूछो इन पाखंडियो से, जब दशरथ पुत्र रामचंद्र का जन्म त्रेता युग में हुआ तो फिर सतयुग में राम कौन था। (7)पूछो इन पाखंडियो से श्री कृष्ण का जन्म आज से 5500 वर्ष पहले द्वापर युग में हुआ था । जबकि त्रेता व् सतयुग के इंसान तो जानते भी नहीं थे कि कृष्ण कौन है ! फिर ये पूर्ण भगवान् कैसे हुए! (8)पूछो इन पाखंडियो से ये कहते है कि वेदों में भगवान् की महिमा है। फिर वेदों में कबीर (कविर्देव) के अलावा 33 करोड़ देवी देवताओ, राम, कृष्ण, व् ब्रह्मा विष्णु महेश दुर्गा किसी का भी नाम तक क्यों नहीं है! (9)पूछो इन पाखंडियो से गीता जी अध्याय नंबर 11 के श्लोक 32 मे श्री कृष्ण जी कहते है की अर्जुन मैं काल हुं और सबको खाने आया हुं । श्री कृष्ण अपने को काल कह रहा है फिर ये पाखंडी उसे जबरदस्ती भगवान् क्यों बना रहे है। और भी ना जाने कितने सवाल जिनके जवाब इनके पास नहीं है। अब तक तो आपजी भी समझ चुके होंगे कि संत रामपाल जी के सामने आकर ज्ञान चर्चा करने की क्यों इनकी हिम्मत नहीं होती है। आपजी इन पाखंडियो से पूछेंगे या नहीं, ये तो आपका अपना फैसला होगा। लेकिन हिन्दुस्तान का नागरिक होने के नाते मैं आपसे पूछता हुं। यदि आपजी ने अब भी विचार नहीं किया तो आप पढ़कर भी अनपढ़ रहे। इस शिक्षा से कमाया हुआ धन आपके साथ कभी नहीं जायेगा लेकिन पूर्ण संत की शरण लेकर कमाया भक्ति धन कई गुना होकर आपजी के साथ जायेगा। जब पृथ्वी पर पूर्ण संत आ चुका है तो मत फंसो इन पाखंडियो के जाल में यदि फसे हुए हो तुरंत निकल जाओ वहां से वरना ये स्वयं तो नर्क में जायेंगे ही जायेंगे तुम्हे भी साथ लेकर जायेंगे। और तुम्हारे बच्चों को भी तैयार कर जायेंगे। यदि संत रामपाल जी को जेल में देखकर आप जी को अभी भी शंका हो तो याद करलो त्रेता में रामचंद्र को भी 14 वर्ष तक जेल काटनी पड़ी थी। सीता जी को भी 12 वर्ष तक भूखी प्यासी रावण की जेल काटनी पड़ी थी। द्वापर में श्री कृष्ण का तो जन्म ही जेल में हुआ था। यदि आप इसे उनकी लीला कहते हो तो कोई बड़ी बात नहीं आने वाले समय में संत रामपाल जी का भी इतिहास बन जायेगा। लेकिन उनके चले जाने के बाद उनके आश्रमो में वे नहीं मिलेंगे केवल पश्चाताप मिलेगा। लेकिन अभी समय है। जाग जाओ औरों को भी जगाओ भगवान् आएगा तो कोई सींग लगाकर नहीं आएगा जो अलग ही दिखाई दे। उसे ज्ञान के आधार से पहचानने के लिए ही तो आज आपजी को उसने शिक्षित किया है। 🏻पुनःप्रार्थना है चिंतन अवश्य कीजिये व् औरों को भी इस मैसेज के माध्यम से इन पाखंडियो के पाखंड से सचेत कीजिये।......

गीता ज्ञान दाता कौन???


Must read ========= प्रश्न: गीता का ज्ञान किसने दिया। प्रमाण सहित बताऐं - उत्तर: गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण जी ने नहीं, बल्कि उनके शरीर में सूक्ष्म रूप से प्रेतवत् प्रवेश करके उनके पिता "काल रूपी ब्रम्ह" ने दिया। काल भगवान, जो इक्कीस ब्रह्मण्ड का प्रभु है, उसने प्रतिज्ञा की है कि मैं अपने व्यक्त रूप में (मानव सदृष्य अपने वास्तविक रूप में) सबके सामने कभी नहीं आऊँगा। (गीता 7.23) उसी ने सूक्ष्म शरीर बना कर प्रेत की तरह श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके पवित्र गीता जी का ज्ञान कहा।जिसे पूर्ण ब्रम्ह के पूर्ण संत के सिवा कोई नहीं जान सका। प्रमाण: विष्णु पुराण में दो जगह प्रकरण है कि काल भगवान महाविष्णु रूप में कहता है कि मैं किसी और के शरीर में प्रवेश कर के कार्य करूंगा। 1. श्री विष्णु पुराण (गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित), चतुर्थ अंश, अध्याय दूसरा, श्लोक 26 में पृष्ठ 233 पर विष्णु जी (महाविष्णु अर्थात् काल रूपी ब्रह्म) ने देव तथा राक्षसों के युद्ध के समय देवताओं की प्रार्थना स्वीकार करके कहा है कि मैं राजऋषि शशाद के पुत्र पुरन्ज्य के शरीर में अंश मात्र अर्थात् कुछ समय के लिए प्रवेश करके राक्षसों का नाश कर दूंगा। 2. श्री विष्णु पुराण (गीता प्रैस गोरखपुर से प्रकाशित) चतुर्थ अंश, अध्याय तीसरा, श्लोक 6 में पृष्ठ 242 पर श्री विष्ण जी ने गंधर्वाे व नागों के युद्ध में नागों का पक्ष लेते हुए कहा है कि “मैं (महाविष्णु अर्थात् काल रूपी ब्रह्म) मानधाता के पुत्र पुरूकुत्स में प्रविष्ट होकर उन सम्पूर्ण दुष्ट गंधर्वो का नाश कर दूंगा”। 3. श्रीकृष्ण जी काल नहीं थे। वे विष्णु जी के अवतार थे।अगर वे गीता ज्ञान बोलते तो अ.11.32 में यह नहीं कहते कि "मैं काल हूँ" और सबका नाश करने के लिए प्रकट हुआ हूँ। वे तो अर्जुन के समक्ष प्रकट हीं थे।और विष्णु जी का अंश थे जो काल नहीं हैं।इसका सीधा मतलब हुआ कि गीता का ज्ञान "काल ब्रम्ह" ने दिया श्रीकृष्ण जी ने नहीं। 4. तीनों देव ब्रम्हाजी,विष्णुजी एवं शिवजी की माता भगवती दुर्गा जी है। इसीलिए इन्हें अष्टांगी, प्रकृति, त्रिदेव जननी आदि नामों से भी जाना जाता है। इसलिए वे विष्णु जी के अवतार श्रीकृष्ण जी के भी माता हुए।अतः प्रकृति यानि दुर्गाजी श्रीकृष्णजी की पत्नी नहीं हो सकती।क्योंकि वे इनकी माता हैं। परंतु गीता 17.3-5 में गीता ज्ञान दाता ने प्रकृति यानी दुर्गा जी को अपनी पत्नी बताया हैं।जिससे पुनः स्पष्ट हो जाता है कि गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण जी ने नहीं दिया।बल्कि उनके पिता काल ब्रम्ह ने दिया। प्रमाण: गीता 17.3-5 "इस लोक में जितने भी जीव हैं प्रकृति (दुर्गा) तो उनकी माता है और मैं (गीता ज्ञान वक्ता) उनकी योनि में वीर्य स्थापित करने वाला पिता हूँ"। इस श्लोक से प्रमाणित हो जाता है कि a). श्रीकृष्णजी अर्थात् विष्णुजी जी की माता प्रकृति यानी दुर्गा जी है। b) उनके पिता ब्रम्ह हैं। काल रूपी ब्रम्ह। जिन्हें महाविष्णु, महाब्रम्हा, महाशिव या सदाशिव के नाम से भी जाना जाता है।जो त्रिदेव यानी ब्रम्हा विष्णु, एवम् शिव के पिताजी हैं। c). गीता का ज्ञान ब्रम्ह यानी कालरूपी ब्रम्ह ने दिया जो अ.17.3-5 में दुर्गा जी को अपनी पत्नी बता रहा है। अ. 8.13 में अपने को ब्रम्ह बता रहा जबकि अ. 11.32 में अपने की काल कहा है। अधिक जानकारी के लिए पढ़े ज्ञान गंगा पुस्तक या सुने साधना टी वी प्रति दिन सायं 7.40 से 8.40 तक। 100% सफलता पाने के लिए अवश्य पढे, परमात्मा की मुफ़्त सेवा का मौका न चूकैं. फ्री पुस्तक के लिए मेरे मेसेज बौक्स में कंटैकट करें या फ्री डाउनलोड करें. Must read "GYAN GANGA" book ,available in all major languages of India also in english & urdu.go to www.jagatgururampalji.org

क्यों नहीं बोलना चाहिए HAPPY NEW YEAR


क्यों हैप्पी न्यू ईयर नही बोलना चाहिए? आइये अब आध्यात्मिक तरीके से इसे समझते हैं हैप्पी न्यू ईयर,गुड मॉर्निंग,गुड नाईट या किसी को आशिर्वाद न देने में हमारा फायदा:- सतयुग द्वापर त्रेता में हमारे पूर्वज नेक नियति से रहते थे और ज्यादातर परमात्मा से डरने वाले होते थे । इसलिए जो भी भगती वृद्धि उन्हें उनके गुरुओं द्वारा बताई जाती वो उस विधि अनुसार तन मन से समय मिलते ही उसमे लगे रहते थे। क्षमा दया दान विवेक सत्यवादिता ये उस समय के लोगों के आम गुण थे।ॐ नाम तक की निस्वार्थ भगति करने के कारण उनमे जुबान सिद्धि आ जाती थी।श्राप और आशिर्वाद ये उन्ही युगों से चली परम्परा है। वो अगर किसी बीमार के सर पे हाथ रख के ये भी कह देते थे के कोई नही ठीक हो जायेगा तो वो बीमार आदमी राहत महसूस करता था। और हम आज लगभग सभी गुणों से हिन् हो चुके हैं। भगती की बात करते ही आजकल लोग चिडते हैं और परम्परा ढ़ोह रहे हैं हम उन युगों की। वास्तव में आज भी बेसक हमारे पास इस जन्म की भगती कमाई नही है लेकिन कई बार हम पिछले जन्मों की कमाई लेकर पैदा होते हैं और उसे हम किसी को गुड मॉर्निंग कह के ,आशिर्वाद दे के और किसी को हैप्पी न्यू इयर कह के उसको भी बाँट देते हैं।ठीक वैसे ही जैसे किसी पानी के भरे गड़े में निचे छेद कर दिया जाये और पानी डाला ना जाये तो वो कितने दिन चलेगा।वो पिछली पूण्य कमाई खर्च होते ही हमारे बुरे दिन शूरू हो जायेंगे। वरना विचार करें के क्या हमारे हैप्पी न्यू इयर कहने से अगले का पूरा साल खुशी से गुजर जायेगा?। नही, क्योंकि ये पावर तो सिर्फ और सिर्फ पूर्ण परमात्मा या उनके भेजे किसी संत के पास ही हो सकती है क्योंकि उनकी पावर खत्म नही होती।हमे अपनी भलाई और वापिस सतलोक गमन जहां से हम सभी आये हैं वहां जाने के लिए ये पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही परम्पराएँ छोड़नी होंगी ,सत्य साधना की खोज करनी होगी। और वो सत्य साधना आजकल बड़ी ही आसानी से उपलब्ध है जो संत रामपाल जी महाराज दवारा 7:40pm से 8:40pm तक साधना टीवी पे दी जाती है। सत साहेब

पूजा के योग्य कौन है? Method of worship


पुण्यात्माओं भक्ति की शुरूवात करने से पहले हमें ये जांच लेना चाहिये की हम जिस को भगवान् मानकर पूज रहे है क्या वो वास्तव में भगवान् है और हमें वे सारे सुख दे सकता है जो हमें चाहिए। 1. जब रामचंद्र जी का राज्य सुख भोगने का समय आया तो उनको स्वयं को 14 वर्ष का वनवाश हो गया। गर्मी सर्दी सहनी पड़ी खाने को समय पर खाना नहीं मिलता था। रहने को टूटी हुई से झोपड़ी बनानी पड़ी जंगली जानवरो का सदा भय बना रहता था। आदि। सोचे........जब रामचंद्र जी स्वयं राज का सुख नहीं भोग सके तो आपजी को कहा से सुख दे सकते है। 2. वनवास में जाते वक़्त उनके माता पिता दशरथ जी व् कौशल्या जी उनको जाने के लिए मना कर रहे थे। लेकिन माता पिता की आज्ञा ना मानकर वे जबरन जंगल में चल दिए और पीछे से उनके पिता का निधन हो गया और माता जी लगभग पागल सी हो गई थी। सोचे.......... रामचंद्र जी बचपन में 4 साल से लेकर 18 वर्ष तक तो सृष्टिकर्ता वाल्मीकि जी के आश्रम में बाण विधा सिखने गए और वहीँ रहे। उसके उपरान्त घर आये तो 14 वर्ष का वनवाश हो गया। वनवास से वापस आये तो उससे पहले बाप की मौत हो चुकी थी व् माता आधी पागल हो चुकी थी। अर्थात जब रामचंद्र जी अपने माता पिता का सुख नहीं भोग सके तो उनकी भक्ति से हमें कैसे माँ बाप का सुख हो सकता है 3......... वनवास के दौरान सीता जी को रावण उठा ले गया अर्थात भगवान् की औरत को एक आदमी उठा ले गया (रावण केवल लंका देश जा एक राजा था और रामचंद्र जी भगवान् विष्णु के अवतार अर्थात स्वयं भगवान्) सीता 10 साल तक भूखी प्यासी रावण से नौ लखाबाग में रही उसके बाद युध्द करके सीता को अयोध्या लाये तो 1 साल बाद एक धोभी के कहने से गर्भवती सीता को जंगल में निकाल दिया और सीता आजीवन जंगल में ही रही। सोचे......... रामचंद्र जी स्वयं पत्नी का सुख नहीं भोग पाये तो उनकी भक्ति से हमें कैसे पत्नी सुख मिल सकता है। 4............ 14 वर्ष के वनवास के समय अपने 2 भाईओ भरत व् शत्रुधन से दूर रहे। और जंगल में ही सीता जी ने लव व् कुश नामक दो बच्चों को जन्म दिया जो आजीवन जंगल में ही उनसे दूर रहे कभी अयोध्या में नहीं आये। सोचे........ रामचंद्र जी स्वयं अपने भाईओ व् पुत्रो का सुख नहीं भोग सके और ना उनको सुख दे सके हो हमें क्या दे सकते है 5......... लंका से सीता को लाते वक़्त राम को सीता के चरित्र पर शंका हुई और सीता को सबके सामने अग्नि परीक्षा देने को कहा । सीता ने अग्नि परीक्षा दी और पवित्र साबित हुई उसके बाद राम ने उसको अपनाया और फिर एक धोबी के कहने मात्र से घर से निकाल दिया। सोचे...... रामचंद्र जी ने अग्नि परीक्षा लेने के बाद भी अपनी पत्नी पर विश्वास नहीं किया। वे 2 रुपए की पांच अगरबत्ती जलाने मात्र से आप और हम पर कैसे विश्वास कर लेंगे। 6......... सीता जी को रावण की कैद से छुड़वाने के लिए राम रावण युध्द में 18 करोड़ सेना का कत्ले आम हुवा था (इतिहास गवाह है) जिसमे सुग्रीव की वानर सेना व् जामवंत की भालू सेना से लेकर भील व् आदिवासी आदि शामिल थे। सोचे......... राम रावण युध्द कोई धार्मिक व् सीमाओ का युध्द नहीं था की जिसमे इतनी सेना मरवाई जाये। अगर भगवान् थे तो अपनी पत्नी को स्वयं छुड़वाकर लाते जिस सीता को छुड़वाने के लिये 18 करोड़ औरतो को विधवा बना दिया दिया करोडो बच्चों को यतीम बना दिया अंत में उसी सीता को जंगल में धक्के खाने के लिए छोड़ दिया। अगर सीता को वापस जंगल में ही छोड़ना था तो क्यों 18 करोड़ सेना का नाश करवाया वो रावण की जेल में ही ठीक थी जहा समय पर खाना तो मिल रहा था। 7......... बाली और सुग्रीव दोनों भाइयो का आपस का सम्पति का विवाद चल रहा था रामचंद्र जी ने धोखे से पेड़ की औट लेकर बाली को बाण से मारा और सुग्रीव को राज गद्दी पर बैठाया। क्यों। सोचे....... बाली को एक वरदान मिला हुवा था यदि कोई आपके सामने होकर युध्द करेगा तो उसकी आधी शक्ति आपके अंदर आ जायेगी और आपको कभी जीत नहीं पायेगा। रामचंद्र को इस बात का डर था की मेरी आधी शक्ति बाली में जायेगी और मै हार जाऊंगा इस लिए धोखे से बाण मार।। बताये बाली भगवान् हुवा या रामचंद्र भगवान् हुवा। सोचे..... हम रामचंद्र जी को मर्यादा पुरषोतम कहते है । एक व्यक्ति को धोखे से पेड़ की औट लेकर मारना कहा की मर्यादा है। सोचे...... सीता जैसी पवित्र औरत को एक धोबी के कहने से घर से निकालना कहा की मर्यादा है। क्या आज आप ऐसा कर सकते है। भगवान् होकर एक औरत के लिए 18 करोड़ औरतो को विधवा बना दिया उनके बच्चों को यतीम बना दिया ये कहा की मर्यादा है। सोचे....... माता पिता के रो रो कर मना करने पर की बेटा वनवास में मत जाओ लेकिन उनकी एक ना सुनना ये कहा की मर्यादा है। सोचे........ सीता के जिद्द कर लेने पर की मुझे ये मृग जिन्दा या मुर्दा लाकर दो। भगवान् होकर उस मासूम व् लाचार पशु को मारने के लिए निकल पड़ा ये कहा की मर्यादा है। सोचे....... रामचंद्र जी द्वारा अश्मेघ में छोड़े गए घोड़े को जब लव व् कुश ने पकड़ लिया तो पूरी अयोध्या की सेना लेकर उन माशूम बच्चों को मारने के लिए निकल पड़ना कहा की मर्यादा है। सोचे..... जब लव व् कुश ने रामचंद्र सहित पूरी सेना को युध्द में हरा दिया टी अपनी हार की शर्मींदगी से वापस अयोध्या ना क जाकर सरयू नदी में राम और लक्ष्मण कूद कर आत्म हत्या कर ली। (इतिहास गवाह है ) सोचे...... आज ये पैसो के लालची नकली पंडित व् गुरु कह देते है रामचंद्र जी ने सरयू नदी में जीवित समाधि लेली और कथा का समापन कर देते है। अरे पैसे के लालची मूर्खो उल्टी सीधी कथा कहानी सुनाकर लोगो को पागल बनाकर अपना पेट भरने वाले मूर्खो अगर जीवित समाधी लेना इतना आशान है तो आप भी लीजिये जीवित समाधी क्योंकि आप रामचंद्र के भक्त हो तो आपको भी उनका ही अनुसरण करना चाहिए और अंत में किसी नदी या गंगा जी में या जमीन में खडडा खोदकर रामचंद्र जी की तरह जीवित समाधी लेनी चाहिए तभी तो आपका मोक्ष होगा।क्योंकि आपके भगवान् का भी तो इसी तरह हुवा था। दोस्तों पहले हमारे पूर्वज अशिक्षित थे और पढ़ने का ठेका केवल इन ब्राह्मणों ने ही ले रखा था। इन्होंने हमारे सद् ग्रंथो को जैसा आधा अधूरा समझा वैसा हमारे अनपढ़ पूर्वजो को सुना कर दान दक्षिणा लेकर अपना पेट पालते थे। लेकिन अब इनकी पोल खुलने लगी है आज हर आदमी शिक्षित हो रहा है अपने सद् ग्रंथो की सच्चाई व् उनमे वास्तव में क्या ज्ञान छुपा है पढ़ व् समझ रहा है। अब शिक्षित समाज इनके पाखंड व् आडम्बरो में नहीं आने वाला है। विशेष। आज हम किस ख़ुशी में दीवाली मनाये। 😔😔😔😔😔😔😔 ? क्या सीता ने कभी दीवाली मनाई ? क्या राम ने कभी दीवाली मनाई ? क्या उनके माता पिता ने कभी दीवाली मनाई ? क्या उनके खानदान में किसी ने दीवाली मनाई 😄😄😄😄😄😄😄😄😄 जरा सोचे क्या हम वास्तव में उस परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ रचना मानव है मानव वो है जिसमे मानवता हो दया प्रेम हो लेकिन आज के दिन। हम हजारो के पटाखे फोड़ते समय आनंद का अनुभव करते है और किसी जरूरत मंद के मदद मांगने पर कहते है अभी हाथ टाइट चल रहा है सारे नियम कायदे कानूनों को टाक में रखकर पर्यावरण की ऐसी की तैसी कर देंगे। और पर्यावरण दिवस पर हरे हरे पोधो के बैनर हाथ में लेकर सड़को पर लोगो को सन्देश देते फिरते है आज लोगो के घर घर जाकर गले मिलते है प्यार प्रेम से रहने के वादे करते है। और अगले ही दिन सड़को पर जरा से साइड की बात को लेकर हाथा पाई करते है। लक्ष्मी की फ़ोटो खरीद कर पूजा करते है धन सम्पदा के लिए। अगले ही दिन उस लक्ष्मी (25 रुपए) को बेच देते है ठेके वाले को दारु के एक पव्वे के लिए। 🙈आज का दिन पैसे वालो के लिए दीवाली और गरीब के लिए दिवाला है🙈

56 करोड़ यादव कटकर मर गये


" श्री कृष्ण जी के समक्ष सभी यादव आपस में लड़कर मर गए थे जो कुछ बचे थे,उनको स्वयं श्री कृष्ण जी ने मूसलों से मर डाले। (प्रमाण:-विष्णु पुराण अ.37 पांचवा अंश पृष्ठ 409 से 414 तक) एक मछियारे शिकारी ने श्रीकृष्ण जी के पैर के तलुए में विषाक्त तीर मारकर वध किया। श्रीकृष्ण जी के शरीर का द्वारिका से बाहर वहीँ पर अंतिम संस्कार किया था ।उनके शरीर को गड्ढा खोदकर पांडवों ने दबाया था। उस स्थान पर वर्तमान में श्री द्वारकाधीश का मंदिर बना है । कुछ समय बाद श्रद्धालु उस यादगार को देखने जाने लगे।फिर वहां पर पूजा प्रारंभ हो गई । वि.स 1505 (सन 1448) में कबीर परमेश्वर जी द्वारिका में गए।समुद्र के किनारे जहाँ गोमती नदी सागर में आकर मिलती है,उसके पास एक बालू रेत के टीले(कोठा)पर अर्थात मिट्टी के ढेर पर बैठकर तीर्थ भ्रमण पर आने वाले श्रद्धालुओं को तत्व ज्ञान सुनाया करते थे । परमेश्वर कबीर जी प्रश्न करते थे कि आप किसलिए आए हैं ? उत्तर होता था कि > द्वारिकाधीश के दर्शन करने आए है।उनकी नगरी को देखने आए है।भगवान के आशीर्वाद लेने आए है । परमेश्वर कबीर जी कहा करते:- एक वैध था और वह नब्ज पकड़ कर रोग जान लेता था।ओषधि देकर स्वस्थ कर देता था। उसकी मृत्यु के उपरांत वैध के शरीर को जमीन में दबा कर अंतिम संस्कार कर दिया।उस स्थान पर एक मंदिर बनाकर यादगार बना दी।यदि वैध की मूर्ती से कोई उपचार के लिए प्रार्थना करे तो क्या होगा ? श्रोताओं का एक सुर में उत्तर :- मूर्ति वैध वाला कार्य थोड़े ही करेगी । प्रश्न :- परमेश्वर प्रश्न करते थे तो उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए ? उत्तर श्रोताओं का :- किसी जीवित वैध के पास जाकर अपनी जीवन रक्षा करनी चाहिए, यही उचित है । परमेश्वर कबीर जी कहा करते थे कि हे भोले श्रद्धालुओ!आप इस श्री कृष्ण त्रिलोकी नाथ की मूर्ति से क्या मांगने आये हो ? क्या यह श्री कृष्ण जी की मूर्ति आप का कल्याण कर सकती है ? उत्तर :- कुछ आश्चर्य करते कुछ कहते कि हम गलत कर रहे है । कुछ नाराज होकर उठ जाते । परमात्मा कबीर जी कहा करते थे कि आप द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण की मूर्ति के दर्शन से कल्याण की अपेक्षा कर के आए हो।यहाँ पर श्री कृष्ण का ही सर्वनाश हो गया।आपको क्या प्राप्ति होगी? आत्म कल्याण तथा सांसारिक सुख प्राप्त करना है तो में आप जी को वह शास्त्रानुकूल भक्ति बताऊंगा जिससे आप का कल्याण संभव है । इस प्रकार सत्य की समजकर भ्रमें हुए श्रद्धालुओ को यथार्थ भक्ति प्राप्त हुई । गरीबदास जी महाराज जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा है कि:- "मेले ठेले जाइयो , मेले बड़ा मिलाप । पत्थर पानी पूजते, कोई साधू संत मिल जात।। जहाँ बैठ कर परमेश्वर कबीर जी सदोपदेश किया करते थे । उस स्थान पर एक गोलाकार चबूतरा (कोठा) बना रखा है । कहा जाता है कि आज तक सन 1448 से सन 2015 (567) तक उस बालू रेत के टीले (कोठे = चबूतरें नुमा गोल चक्र ) को समुद्र की लहरें ने छुवा भी नहीं। समुद्र में ज्वार भाता आता है । तब भी समुद्र की लहरें उस ओर नहीं जाती । यह कबीर कोठा द्वारिकाधिश के मंदिर के बगल में है ।

कबीर वाणी


सत् साहेब सतगुरु देव की जय Kabir Is God- सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। -गरीबदास जी और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।। -दादु दयाल जी वाणी अरबो खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार। करता पुरुष कबीर, रहै नाभे विचार।। -नाभादास जी साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल। ज्ञान गम्या से देदीया, कहै रैदास दयाल॥ -रैदास जी नौ नाथ चौरसी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान। अवीचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥ -गोरखनाथ जी खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥ काइम दिइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥ सयदे (सजदे) करे खुदाई नू आलम बडा कबीर॥ -नानक जी बाजा बाजा रहितका, परा नगरमे शोर। सतगुरू खसम कबीर है, नजर न आवै और॥ -धर्मदास जी सन्त अनेक सन्सार मे, सतगुरू सत्य कबीर। जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥ -जगजीवन जी तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश। कहै रामानन्द निज ब्रह्म तुम, हमरा दुढ विश्वास।। -रामानन्द जी कबीर इस संसार को, समझांऊ के बार । पूंछ जो पकङे भेड़ की, उतरया चाहे पार ॥ -कबीर साहेब** सत् साहेब..

संत रामपाल जी पर लगे आरोप बेबुनियाद

हिम्मत है तो मेरे गुरु पर लगे आरोप सिद्ध करके दिखाओ हिम्मत है तो मेरे परमेश्वर द्वारा दिए ज्ञान को गलत साबित करके दिखाओ अरे मूर्खों :- समझो दिमाग का प्रयोग करो पूरे ब्रह्माण्ड के धर्म गुरुओं को ललकारने वाला सभी धर्मों के गर्न्थो को खोलकर संगत को शिक्षित करने वाला प्रमाण सहित धर्मगुरुओं को गलत साबित करने वाला छाती ठोक कर अपने आप को परमेश्वर का दूत्त कहने वाले को कोई जेल में कैसे बन्द कर सकता है ? या तो कोई कारण है जिसे ना तुम समझ पाये और ना ज्योति निरंजन जब जगत गुरु जेल से बाहर आएंगे तुम भी पछताओगे और तुम्हारा आका भी रोहतक वाली जिस जेल में सन्त रहा वहां से जेल को ही ट्रांसफर करना पड़ा आज वहां पार्क है । फिर हिसार वाली जेल भी कहाँ रह पावेगी ? खट्टर फटर की तो विसात ही क्या ? हमारी लड़ाई ज्योति निरंजन भगवान से हैं मेरी लड़ाई अज्ञान से है और आखिर जीत मेरी है मेरी संगत की है। सत साहेब

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

भवसागर के पक्षी। There are three types of whirlpool bird.


🙏🌹सत साहिब जी🌹🙏 भौसागर के पक्षी तीन प्रकार के होते है, जो कि इस प्रकार है| जगत के पक्षी 👉 ये हमेशा आकाश मे ही उडते रहते है और इनको किसी बात की चिंता और भगवान से डर नही होता है | कहावत है कि अपनी खाल मे मस्त रहते है| पर इनको ज्ञान नही है कि यहा का बाजीगर(काल) एक दिन पंख काट देगा| इनका जीवन उद्देश्य बकवास करना और मौज मस्ती मारना होता है| जगत&भगत पक्षी👉 ये सबसे अजीब पक्षी होते है भौसागर के जो कि आकाश से गिरते है खजुर मे आकर अटक जाते है| हमेशा यही सोच मे रहते है कि आकाश मे वापस जाऊ या धरती पर जाऊ| कहावत है कि धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का| दिलचस्प बात यह है कि इनका उद्देश्य ही नही होता है, खजुर पर जो बैठता है वो कभी आकाश की ओर देखता है तो कभी धरती की ओर | फिर ये भी पंख कटवा लेते है बाजीगर से| भगत पक्षी👉 ये बहुत ही अच्छे पक्षी होते है जो अपनी औकात से परिचत हो जाते है| क्योकि इनको ज्ञान हो चुका होता है कि दाना-पानी धरती पर ही मिलेगा| ना तो खजुर पर अटकने से मिलेगा और ना ही आकाश मे उडने से | इनका उद्देश्य बाजीगर के ही पंख काटकर(काल के जाल) अपने घर(सतलोक) मे जाना होता है| 🙏🌹जय बंदीछोड की🌹🙏

आज हम 21 वीं सदी में जी रहें हैं।


दोस्तों आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं आज आप शिक्षित हैं और आज आपको कोई मूर्ख नहीं बना सकता इसलिए दोस्तों स्वयं परखने की ज़रूरत है क्या सही है और क्या गलत बेहतर यही होगा और हमारा निष्पक्ष भाव होना चाहिए दोस्तों पहली बात तो बिना गुरु के भक्ति हो ही नहीं सकती और दूसरी बात इस धरती पर 100 गुरु में से 99 तो नकली, झूठे, और पाखंडी है क्योंकि इन सब का ज्ञान हमने शास्त्रों के मापदंड से मापकर देखा है और आप भी देखना चाहे देख सकते हैं निष्पक्ष भाव से, दोस्तों इस धरती पर कोई पूर्ण संत है तो वह संत रामपाल जी महाराज हैं क्योंकि उनकी बताई गई साधना शास्त्रविधि अनुसार है और 100% authentic और लाभकारी भी, बाकी सारे धर्म गुरुओं की साधना शास्त्रविरुद्ध है मित्रों यहां आपको स्वयं परखने की जरूरत है क्योंकि आज तक हम दूसरे के बहकावे में आकर मूर्ख बनते रहे। श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है, हे अर्जुन जो पुरुष शास्त्रविधि को त्याग कर मनमाना आचरण करता है मनमानी पूजाऐं करता है उसको ना सुख न तो सिद्धि और ना ही परम गति ही प्राप्त होती है इसलिए हे अर्जुन कर्तव्य और आकर्तव्य की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण है इसलिए शास्त्र विधि अनुसार साधना करनी चाहिए

क्या आपको विज्ञान में रूचि है?


सृष्टी के सबसे बड़े वैज्ञानिक : कबीर साहेब जी ________________________________ क्या आपको विज्ञान में रूचि है? ________________________________आम आदमी की विज्ञान में रूचि हो या ना हो, लेकिन वह भी वैज्ञानिक खोजों के प्रति काफी उत्सुक रहता है. हम जिन वैज्ञानिकों या खोजों के बारे में जानते है, वह मात्र हमारे एक बह्माण्ड के आस-पास ही केन्द्रित है. लेकिन क्या आपको मालूम है...,हम जिस ब्रह्माण्ड में रहते हैं, ऐसे पूरे 21 ब्रह्माण्ड मौजूद हैं और इन 21 ब्रह्माण्डों में हमारे ब्रह्माण्ड के जैसे ही रचना मौजूद है. वहाँ भी हमारे जैसे मनुष्यों का वास है. नदी है...पहाड़ है...झरने हैं...जानवर हैं...पक्षी हैं...सब कुछ है, जो भी हमारे ब्रह्माण्ड में मौजूद है. कबीर जी के दोहे हम बड़े चाव से पढ़ते है और तारीफ भी करते है.....लेकिन क्या कभी हमने इस ओर ध्यान दिया की उन्होंने असंख्य ब्रह्माण्डों के बारे में विस्तृत जानकारी दी है. ....तो चलिये चलते हैं, उस अनंत ज्ञान की ओर, जो कबीर जी हमारे लिये छोड़ गये हैं... चलिये समझते हैं कबीर जी के उस ज्ञान को जो वर्षो से किताबों में बंद है. उस ज्ञान को बाँटा जा रहा है सतगुरू रामपाल जी महाराज के द्वारा______ जन-जन के लिये उपलब्ध ज्ञान______ इस अमृत ज्ञान की वर्षा में भींगकर आप भी तृप्त हो जायेंगे________________ *****कबीर परमेश्वर का ज्ञान : आपके लिये, आपके घर तक***** (देखना ना भलें साधना चैनल पर रोज शाम 7:40 बजे कबीर जी की अनमोल वाणियों का सार-संदेश) ///पूर्णब्रह्म सतगुरू रामपाल जी महाराज की जय/// ######सत साहेब#####