गुरुवार, 28 अप्रैल 2016

जीव हिंसा महापाप है


कबीर परमात्मा कहते हैं जो व्यक्ति जीव हिंसा करते हैं वे महापापी हैं, वे कभी मुक्ति प्राप्त नहीं कर सकते। जरा सा(तिल के समान) भी मांस खाकर भक्ति करता है, चाहे करोड गाय दान भी करता है, उस साधक की साधना भी व्यर्थ है। मांसाहारी व्यक्ति चाहे परमात्मा प्राप्ति के लिए गर्दन भी कटवा ले, वह नरक में ही जाएगा। कबीर मांस मांस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय। आंखि देखि नर खात है, ते नर नरकहिं जाए।। कबीर तिलभर मच्छली खायके, कोटि गऊ दे दान। काशी करौंत ले मरे, तो भी नरक निदान।। कबीर कहता हूँ कहि जात हूँ, कहा जो मान हमार। जाका गला तुम काटि हो, सो फिर काटै तुम्हार।। कबीर परमात्मा कहते हैं कि इस दुनिया में हर चीज का बदला देना पडता है। इस जन्म में तुम किसी की हत्या करोगे तो अगले जन्म में वह तुम्हारी हत्या करेगा। यदि मारने का शौक है तो काम, क्रोध, मोह, लोभ, अहंकार को मारो। जीभ के स्वाद के लिए जीव हिंसा करना गलत है। कृपा शाकाहार अपनाए। जय बन्दीछोड की। सत साहिब जी।

वास्तविक धन क्या है


वास्तविक धन आज मनुष्य सब सुख सुविधाओं की कामना करता है और उनकी प्राप्ति के लिए दो नम्बर का काम, लूट खसोट, मिलावट, चोरी डकैती, धोखाधडी सब कुछ करता है..................... पर मनुष्य ये भूल गया है कि जो विधाता ने हमारे भाग्य में लिख दिया केवल वही मिलेगा,,,मनुष्य भाग्य में लिखे को नहीं बदल सकता। उसकी दो नम्बर की कमाई किसी भी तरह उसके पास नहीं टिक सकती........ या तो उसके परिवार के किसी सदस्य के कोई बिमारी होगी, या कोई दुर्घटना घट जाएगी या व्यापार में कोई नुकसान लग जाएगा........इस तरह वह अतिरिक्त कमाई खत्म हो जाएगी। वह कमाई तो जानी ही होती है शेष रह जाते है उसको कमाने में होने वाले पाप। दो नम्बर की कमाई तो हमारा साथ केवल कुछ समय तक देती है............सतगुरू बताते हैं कि असली कमाई तो परमात्मा का नाम जाप, दान करना व भूखे को भोजन खिलाना है जिसकी कमाई हमारे मरने के बाद भी हमारे साथ जाती है। कबीर सब जग निर्धना, धनवंता ना कोए। धनवंता सोए जानिये, जापे राम नाम धन होए।। कहें कबीर समुझाय के, दोई बात लखि लेह। एक साहिब की बंदगी व भूखों को कुछ देय।। सतगुरूदेव जी की जय। सत साहेब जी।

कबीर साहेब का गोरख नाथ जी के साथ ज्ञान चर्चा


🏻 जब कबीर साहिब की उम्र पांच वर्ष की थी तब गुरु गोरखनाथ ने उनसे ज्ञान चर्चा करते हुए उनकी आयु के बारे में सवाल किया था तब कबीर साहिब ने यह जवाब दिया था । 🏻 जो बूझे सोई बावरा, क्या है उम्र हमारी। असंख युग प्रलय गई, तब का ब्रह्मचारी।।टेक।। कोटि निरंजन हो गए, परलोक सिधारी। हम तो सदा महबूब हैं, स्वयं ब्रह्मचारी।। (करोड़ों निरंजन मर चुके हैं) अरबों तो ब्रह्मा गए, उनन्चास कोटि कन्हैया सात कोटि शम्भू गए, मोर एक नहीं पलैया।। (49करोड़ श्रीकृष्ण,7करोड़ शिवजी मर चुके हैं) कोटिन नारद हो गए, मुहम्मद से चारी। देवतन की गिनती नहीं है, क्या सृष्टि विचारी।। नहीं बुढ़ा नहीं बालक, नाहीं कोई भाट भिखारी। कहैं कबीर सुन हो गोरख, यह है उम्र हमारी।। (मेरी कोई उम्र नहीं है) ज्ञात रहे :-कबीर साहेब ने किसी माँ की पेट से जन्म नहीं लिया था प्रकाश का गोला आसमान से आया और कमल के फूल पर बच्चे के रुप में परवर्तित हो गया था। मृत्यु के वक्त भी उनका शरीर नहीं मिला शरीर के स्थान पर केवल सुगंधित फूल मिले थे॥ हम ही अलख अल्लाह है,कुतूब गौस और पीर। गरीबदास खालिक धनी हमरा नाम कबीर॥ सतगुरु पुरुष कबीर है,चारों युग प्रवान। झूठे गुरु मर गए,हो गए भूत मसान॥ :- आजकल के नकली गुरु भोली भाली आत्मांओ को नरकों की ओर धकेल रहे है।संसार में बहुत सारे गुरु पैदा हो गए थे इसलिए परमात्मा को स्वयं कबीर साहेब के रुप में सतगुरु की भूमिका निभाने के लिए पृथ्वीलोक में आना पड़ा । अवधु अविगत से चल आया, कोई मेरा भेद मर्म नहीं पाया।।टेक।। ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक ह्नै दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा,तहाँ जुलाहे ने पाया।। माता-पिता मेरे कछु नहीं, ना मेरे घर दासी। जुलहा को सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।। पांच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानूं ज्ञान अपारा। सत्य स्वरूपी नाम साहिब का, सो है नाम हमारा।। अधर दीप (सतलोक) गगन गुफा में, तहां निज वस्तु सारा। ज्योति स्वरूपी अलख निरंजन (ब्रह्म) भी, धरता ध्यान हमारा।। हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी। तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।। उसके बाद जिन संतों को कबीर साहेब ने जिन्दा रुप में दर्शन दिए! वह भी सतगुरु कहलाए। लेकिन आजकल तो एक कथा वाचक भी अपने आप को सतगुरु कहता है। "सद्गुरु के लक्षण कहुं,मधुरे बैन विनोद।चार वेद षट् शास्त्र,कह अठारह बोध।।" सतगुरु की एक पहचान होती है जोकि कबीर साहेब ने सूक्ष्मवेद में वर्णित कर रखी है। सत् साहेब जी जय हो बंदछोड़ की

संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान का पाकिस्तान में भी दिखा असर


सन्त रामपाल जी महाराज के ज्ञान का पाकिस्तान मे भी दिखा असर। जेल जाने से पूर्व नेपाल भूटान मे अपने तत्व ज्ञान का डंका पीट चुके एवं सभी तथाकथित सन्तो को अध्यात्मिक ज्ञान चर्चा मे परास्त करने वाले सन्त रामपाल जी महाराज से जुड़ने वालो की लहर सरकार के तमाम प्रयासो के बाद रोके नही रुक रही है। और तो और भारत के धुरविरोधी देश पाकिस्तान मे भी सन्त रामपाल जी महाराज से जुड़ने का सिलसिला प्रारम्भ हो गया है।विगत एक हफ्ते मे पाकिस्तान के 529 लोगो ने सन्त रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के माध्यम से दीक्षा ली है। जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नही कोई न्यारा।। का नारा बुलन्द करने वाले सन्त रामपाल जी महाराज का ज्ञान विदेशो मे भी सिर चढ़ कर बोल रहा है।पाकिस्तान भूटान नेपाल समेत अन्य देशो मे भी सन्त रामपाल जी महाराज के अनुयायियों की तादाद निरन्तर बढ़ रही है। अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि सन्त रामपाल जी महाराज के विरुद्ध बनाये गये केस मनगढन्त व झूठे है।मीडिया को भी हरियाणा की सरकारी मशीनरी ने कूटनीतिक षडयन्त्र के तहत गुमराह किया।आखिरकार एक वर्ष बीत जाने के वाबजूद क्यो हरियाणा पुलिस अभी तक एक भी सबूत सन्त रामपाल जी महाराज के विरुद्ध पेश नही कर पायी है।

कबीर साहेब द्वारा मृत लड़के कमाल को जीवित करना


मृृत लड़के कमाल को जीवित करना ***** एक लड़के का शव (लगभग 12 वर्ष का) नदी में बहता हुआ आ रहा था। सिकंदर लोदी के धार्मिक गुरु (पीर) शेखतकी ने कहा कि मैं तो कबीर साहेब को तब खुदा मानूं जब मेरे सामने इस मुर्दे को जीवित कर दे। साहेब ने सोचा कि यदि यह शेखतकी मेरी बात को मान लेगा और पूर्ण परमात्मा को जान लेगा तो हो सकता है सर्व मुसलमानों को सतमार्ग पर लगा कर काल के जाल से मुक्त करवा दे। सिकंदर लोदी राजा तथा सैकड़ों सैनिक उस दरिया पर विद्यमान थे। तब पूर्ण ब्रह्म साहेब कबीर ने कहा कि शेख जी - पहले आप प्रयत्न करें, कहीं बाद में कहो कि यह तो मैं भी कर सकता था। इस पर शेखतकी ने कहा कि ये कबीर तो सोचता है कि कुछ समय पश्चात यह मुर्दा बह कर आगे निकल जाएगा और मुसीबत टल जाएगी। साहेब कबीर ने उसी समय कहा कि हे जीवात्मा! जहाँ भी है कबीर हुक्म से इस शव में प्रवेश कर और बाहर आजा। तुरंत ही वह बारह वर्षीय लड़का जीवितहो कर बाहर आया और साहेब के चरणों में दण्डवत् प्रणाम की। सब उपस्थित व्यक्तियों ने कहा कि साहेब ने कमाल कर दिया। उस लड़के का नाम ‘कमाल‘ रख दिया तथा साहेब ने उसे अपने बच्चे के रूप में अपने साथ रखा। इस घटना की चर्चा दूर-2 तक होने लगी। कबीर साहेब की महिमा बहुत हो गई। लाखों बुद्धिमान भक्त आत्मा एक परमात्मा (साहेब कबीर) की शरण में आ कर अपना आत्म कल्याण करवाने लगे। परंतु शेखतकी अपनी बेईज्जती मान कर साहेब कबीर से ईष्र्या रखने लगा। — Sat Sahib ji

राम का मरम कबीर ने जाना


🙏राम राम करता सब जग फिरे । राम न पाया जाये ।। रामन लोग खिलौना माना । राम का मरम कबीर मन जाना ।। एक बार कबीर साहब किसी के घर कथा करने गये कबीर साहब ने कथा के दौरान बताया कि राम राम जपने वाला संसारिक बंधनो से आजाद हो जाता है इस बाणी को सतसंग मे बैठे लोगो ने सुना या नही सुना मगर उस घर मे एक तोता पिजडे मे बैठे ध्यान से सुन रहा था कबीर साहब के चले जाने के बाद तोता राम राम रटता रहा कि सायद मै इस छोटे से पिजडे से आजाद हो जाऊ पिजडा तो संसार से बहुत छोटा है लेकिन तोता आजाद नही हुआ उसी घर मे कथा करने के लिये कबीर साहब कुछ दिनो बाद पुनः आये तो तोते ने कबीर साहब को बोला बाबा जी आप लोगो को मूर्ख बनाना बंद करे मैने उस दिन से लगातार राम नाम जोर जोर से रटा परन्तु मै आजाद नही हुआ तोते की बात को सुनकर बाबा जी ने कहा तोते जैसे मैने कहा था वैसे तुमने नही जपा सुन कैसे जपना है लाख नाम संसार के ताते मुक्ति न होय आदि नाम जो "गुप्त" जप बूझै बिरला कोय... --संत सहजो बाई किसी भी कार्य को अगर युक्ति पूर्बक किया जाये तभी अंजाम मिलता है कबीर साहब ने कहा सुन तोते आज से अंतरध्यान होकर राम नाम का जप करना अगर फिर भी पिजरे से आजाद नही हुऐ तो मै अपनी फकीरी छोड दूंगा तोते ने ठीक वैसे ही किया कैसे ?? आख कान मुंह झापकर नाम निरंजन ले अंदर का पट तब खुले बाहर का जब दे {यानी बंद कर} तोते ने ठीक इसी युक्ति अनुसार राम नाम का जप करने लगा एक दो दिन बाद तोते के मालिक को लगा कि तोता मर गया न बोले न डोले न कुछ खाये पिये अतः मालिक ने तोते को पिजडे से निकालकर बाहर फेक दिया फेकते ही तोता हवा मे उडा और बोला कबीरा तेरा रामनाम सत्य है जो कोई करै मन चितलाये.. भावार्थ बिधि पूर्बक किया गया हर एक कार्य सफल होता है.. 🌷🙏 जय बन्दी छोड़ की 🙏🌷

यह मानव जीवन परमात्मा प्राप्ति के लिए मिला है


यह मानव जीवन अपनें परम पिता परमेश्वर की प्राप्ति के लिए मिला है! क्योंकि यह दुनिया हमारी नहीं है इए तो काल भगवान ज्योतिनिरन्जन की है! जो कि रोज एक लाख शरीर धारी आत्माँओं को तप्तशिला पर भुन कर खाता है व रोज सवा लाख पैदा करता है! यह ब्रह्मा विष्णु शिव इन तीनों का बाप और दुर्गा का पती है! इसनें शपथ ली थी कि अपनें वास्तविक रूप किसीके सामनें नहीं आऊँगा, इसके लिए कोई कितना भी जप तप करे! आश्चर्य करनें वाली बात यह है कि इसका जाप करनें वाला मन्त्र ओम् है! यही कारण था कि ओम् जाप करते करते श्रिषियों नें अपनें शरीर तक गला दिये लेकिन भगवान नहीं मिला, और वो विचारे श्रिषि अपना अनुभव पुराणों में लिखकर चले गये, कि भगवान निराकार है, इसी को पढकर इए दुनिया आज तक बेबकूफ बनी रही और हम अपनें परम पिता परमेश्वर से कोशों दूर हो गये, और यह बात विद् पिरमांणों सहीत मुझे सत् गुरू रामपाल जी महाराज के शरण में जानें के बाद पता चली, और वो पिरमाण गुरू जी नें कुरान शरीफ, बाईबल, अथर्वेद, सामवेद, रिग्वेद, यजुर्वेद, श्रीमद् भगवद् गीता से खोलकर दिखाए, और उन्होंनेें यह सिध्द कर दिया कि सबका मालिक एक है वो कहाँ रहता है कैसे मिलेगा वो भक्तिविधी इस काल की दुनिया से छुटकारा पानें के लिए मानव को दी है, जिससे हम अपनें निज घर सतलोक पहुच सकेगें, जहाँ हमारे तेजपुन्ज के शरीर हैं, जन्म का कष्ट बुढापे का कष्ट बीमारी, लडाई झगड़ा यह सब नहीं है वहाँ पर हम सदा सुखी रहते हैं! यह सब मैनै जो लिखा है इसे पढ़कर आप जी के मन में शंकाएं भी पैदा हुई होगीं, लेकिन इसके लिए आप जी से हाथ जोड़कर विनती है एक बार सत् गुरू रामपाल जी महाराज द्वारा लिखी हुई ज्ञानगंगा पुस्तक पढ़कर अनुसरण जरूर करें, आपकी शंकाओं का समाधान पिरमाणों सहित उसी पस्तक से हो जायेगा! प्लीज आप इए ना देखना कि हमारे गुरूजी जेल में है तो वो गलत है, क्योंकि जो सत्य का मार्ग दिखाता है दुनिया उसके खिलाफ होती है लेकिन जीत हमेसा सत्य की ही होती है, इस बात की गबाही हमारे ही पुरानें इतहासों में मिलती है, हमारी पूरे सन्सार से विनती है कि इस थोड़ी सी बात के पीछे परमात्मां से मूँह न मोड़ो, अगर आपका इए अनमोल मानव जीवन इस काल छीन लिया तो सिवाय पछतानें के अलावा आपके पास कुछ भी नहीं बचेगा! मानुष जन्म दुर्लभ है इए मिले न बारम्बार, जैसे पेड़ से पत्ता टूट गिरै बहूर न लगता डारि! समझदार के लिए संकेत ही काफी है! सत् साहेब

भक्ति करना कोई बालकों का खेल नही

भगती करना इन नकलियों ने बालको का खेल बना दिया ! बस सुबह शाम दो मिन्ट मदिंर मस्जिद में गऐ हो गया बेड़ा पार या किसी को दो चार रूपये दान दे दिया ! बाद में सारा दिन लूट खसोट चोरी डाके रिश्वतखोरी में लगे रहते है ! मदिंर में होते है उस टाईम इन से शरीफ धरती पर कोई नही होता ! अरेे भाई ये कोई भगती नही है भगती कैसी होती है ये संत रामपाल जी महाराज के वचन सुने फिर पता चलेगा भगती किसको कहते है ! ड्रामे बाजी और शास्त्रविरूद्ध साधना में कुछ नही रखा !! यदि आप शास्त्रों के अनुसार भक्ति नहीं कर रहे तो उस भक्ति का कोई लाभ नहीं, चाहे करो या ना करो। ये बात हम नहीं हमारी पवित्र गीताजी कह रही हैं। गीता अध्याय नं. 16 का श्लोक नं. 23 यः, शास्त्रविधिम्, उत्सज्य, वर्तते, कामकारतः, न, सः, सिद्धिम्, अवाप्नोति, न, सुखम्, न, पराम्, गतिम्।। अनुवाद: जो पुरुष शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से मनमाना आचरण करता है वह न सिद्धि को प्राप्त होता है न परम गति को और न सुख को ही। शास्त्रानुकुल साधना पाने के लिए सुनिए संत रामपाल जी महाराज के अमृत वचन साधना चैनल पर प्रतिदिन 07ः40-08ः40 तक।

मंगलवार, 26 अप्रैल 2016

काल के 21 ब्रह्मांड यानी माया देश में आगमन


जब भी प्राणी का मनुष्य-योनी में जन्म लेने का समय आता है। तब वह पिता के वीर्यकण के द्वारा माता के "रज' में मिलकर उदर में पड जाता है। वहाँ पर एक रात्रि में कँवल बन जाता है। पाँच-रात्रियों में गोलाकार-अण्ड बन जाता है। तथा दस रात्रियों में बेर के मानिन्द-कठोर हो जाता है। अण्डज-प्राणियों का अण्डा बन जाता है। एक-मास पश्चात् उसका सिर बन जाता है। दो-महीनें में उसके हांथ-पाँव आदि बन जाते है। तीसरे महीनें में अस्ति, चर्म, स्त्री-पुरूष के चिह्न, नख, रोम आदि बन जाते है। चौथे-महीनें में सातों धातुएँ उत्पन्न हो जातीं है। पाँचवें-मास में क्षुधा-पिपासा आदि का ज्ञान होता है। छटवें-महीनें में वह झिल्ली-युक्त होकर दाहिनी-कोख में चमकने लखता है। उस समय वह माता के भोजन तथा जल, विष्ठा आदि में पडा "यातना-भोगता" है। उसके अंग कोमल-कमल होते है। वह किटाणुओं द्वारा तथा माता के खाये हुए चरपरो, लेह, अम्ब भोजन् से उसे महान-पीडा होती है। वह पिंडात्मक-प्राणी-प्रकृतिरूप-माया के उदर के बन्धन में कसा रहकर तडफडाने लगता है। उस क्षण् #भगवान्" की प्रेरणा से उसे स्मरण्-शक्ति उत्पन्न हो जाती है। और वह उस समय अपने सौकडों-जन्मों को स्मरण् करके रोने लगता है। व्याकुल होने लगता है। सातवें-महीनें में उसकी विवेक-शक्ति जाग्रत हो जाती है। वह प्रसूति-वायु से प्रेरित होकर इधर-उधर घूमने लगता है। उसे गर्भ में अति-कष्ट प्राप्त होता है। तब वह #परमात्मा" से प्रार्थना करता है। #जीव_कहता_है; हे महान-ईश्वर ! मैं बडा पापी हुँ। मुझे इस अधोगति से बाहर निकालिये। आप ही इस संसार के उत्पत्ति-कर्ता है। आप अविकारी, अविनाशी तथा माया से रहित है। मैं आपको प्रणाम् करता हुँ। मैं अहंकार, इँद्रिय आदि गुणों से युक्त हुँ। और आपप्रकृति और पुरूष' के नियन्ता होने के कारण् इन दोनों से परे है। सर्वज्ञ है। माता का उदर साक्षात् मल-मूत्र तथा रूधिर का कुण्ड है। मैं इस नरक में पडा हुआ कष्ट भोग रहा हुँ। हे परमात्मा ! आप मुझ दीन को यहाँ से शीघ्र निकालिए। हे दिनबन्धु ! मै निरंतर आपका भजन् करूँगा। तथा आप ही की शरण् में रहुँगा। उस संसार-कष्ट से तो यह उदर का कष्ट ही ठीक है। पॄथ्वि पर गीरते ही आपकी-माया-जीव को घेर लेती है। मुझे ऐसा मार्ग सुझाऐं जिससे मैं संसार-चक्र से मुक्त हो जाऊँ? इस तरह प्रार्थना करते हुऐ उदर-वायु उसे बाहर ढकेल देती है। इस तरह वह बारह आकर छटकटाने लगता है। पॄथ्वि में आते ही उसका सारा-ज्ञान लुप्त हो जाता है। और वह रोने लगता है। श्नै: श्नै: प्रकृति में स्थित अन्य जीव-संबंधि माया में फँसे मायामय लोग उस बालक को मोह लेते है। और वह हँसनें लग जाता है। इस प्रकार उसका बालपन, कौमाराव्सथा, समाप्त होने पर #युवा हो जाता है। और अज्ञानवश कामासक्त होकर #माया के विषय-वासनाओं में लीन हो जाता है। उदर में "भगवान्" से कि हुई प्रतिज्ञा उसे भुल जाती है। वह अपनी ईच्छा-शक्तिके लिए अनेक पाप करता है। अविद्या में फँसकर कर्मसुत्रमें बंधता जाता है। वह ब्रह्म की वैष्णवीमाया-रूपी-स्त्री के चक्कर में ऐसा फँसता है। कि सर्वस्व खो बैठता है। इस प्रकृतिरूपमाया की शक्ति इतनी प्रबल है। कि पॄथ्वी के बडे-बडे भू-विजयी-वीरों को अपने वश में कर लेती है। इस हेतु हे जगत्-जीवांतकों #आत्मज्ञान्" की ओर लौटो। *परमात्मा-प्रत्येक-आत्मा* के लौटने की प्रतिक्षा में है। !!!!! परमात्मा कबीर !!!!!

रविवार, 24 अप्रैल 2016

दोगली सरकार का अंत होने ही वाला है।Nearing the end of this government.


भ्रष्ट हरियाणा सरकार व दोगली मोदी सरकार का अंत होने ही वाला है, बस कुछ ही दिनों की तो बात है..... ये जीव हैं, इनको शायद पता नहीं है राजसत्ता की अभिमान में अच्छा बुरा भी भूल चुके है.. मोदी साहब उसकी लाठी में आवाज नहीं होती.. कुछ शर्म है तो करवा दो live CBI जांच हो जाय दूध का दूध, पानी का पानी.. संत रामपाल जी महाराज कोई साधारण इंसान नहीं है. इस बात को तो मोदी साहब.. आप जानते हो न , आपने तो आस्ट्रेलिया और बीस देशों से संत रामपाल जी महाराज को पकड़ने के लिये मदद की गुहार लगाई थी.. और इस बात को स्वीकारा था कि वे कोई साधारण संत नहीं हैं. हमारे भगतों ने तो लाखों लेटर भी भेजे हैं कि भ्रष्ट जजों की जवाब देही तय हो .. लेकिन. अंधेर नगरी चौपट राजा.. मोदी जाग जाओ अभी भी समय है नहीं तो ...समय का इंतजार करो, समय ही बताएगा.. कि संत सताए तीनों जांही, तेज बल और वंश. ऐसे ऐसे कई गए रावण कौरव और कंश.. कहीं आप भी इस गिनती में शामिल हो. कबीर साहेब ,- जो सताए मेरे अंश को, मिटा दूं उसके वंश को.. जागो अब भी समय है संत बहुत दयालु हैं.

गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

Satguru be a necessary condition of the path of devotion.


🙏भगति मार्ग में सतगुरु का होना एक आवश्यक शर्त। परमात्मा की प्यारी आत्माओं, भक्ति के मार्ग में एक अत्यंत ही जरुरी और महत्वपूर्ण भूमिका होता है "गुरु" का, जिसके बगैर हम इस संसार सागर से कतई पार नहीं हो सकते। जबकि तत्वज्ञान के अभाव में अक्सर लोग कह देते है, भगत और भगवान के बीच में गुरु का क्या काम ? बस यही पर आप मार खा जाते है। गुरु महिमा के विषय में गोस्वामी तुलसी दास जी लिखते हैं:- गुरु बिन भव निधि तरई न कोई।जो विरंची शंकर सम होई ।। अर्थात् बिना गुरु के संसार सागर से कोई पार नहीं हो सकता चाहे वह ब्रम्हा व शंकर के समान ही क्यों न हो। यही नानकदेव जी कहते हैं:- गुरु की मूरत मन में ध्याना । गुरु के शब्द मंत्र मन माना ।। मत कोई भरम भूलो संसारी । गुरु बिन कोई न उतरसी पारी ।। परमात्मा प्राप्त कर चुकी मीरा बाई ने कहा है:- पायो जी मैने, राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, करि कृपा अपनायो।। पायो जी मैने, राम रतन धन पायो ।। कबीर साहेब ने तो यहॉ तक बताया है :- राम कृष्ण से कौन बड़ा, उन्हूँ भी गुरु कीन । तीन लोक के वे धनी, गुरु आगे आधीन ।। फिर कहा है: गुरु बिन माला, फेरते गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों निष्फल है, चाहे पूछो वेद पुराण ।। अर्थात् गुरु के बिना किया गया जाप व् दान (भगति) सबकुछ व्यर्थ है। इसलिए भक्ति मार्ग में अब हमें बड़ी गहनता से इस विषय को समझना होगा क्योंकि अब के जो हम चूके तो न जाने कब यह नर तन मिले ना मिले। नर तन मिल भी जाए तो सतगुरु मिले ना मिले क्योंकि : गुरु - गुरु में भेद है, गुरु - गुरु में भाव।सोई गुरु नित बंदिये, जो शब्द लखावै दाव ।। अब हमारे सामने बड़ी सबसे बड़ी विडम्बना है कि हम सतगुरु की परख कैसे करें। क्यों कि हमारे यहाँ तो गुरूओं की बाढ़ सी आई हूई है। तो इस समस्या के निदान के लिए नीचे हर स्तर के गुरुओं की महिमा बताई जा रही है। जिनमें से सतगुरु को पहचानकर और उनकी सही स्थिति को जानकर अपना नैया पार लगाना है : प्रथम गुरु है पिता अरु माता | जो है रक्त बीज के दाता || हमारे माता पिता हमारे प्रथम गुरु हैं | दूसर गुरु भई वह दाई | जो गर्भवास की मैल छूड़ाई || जन्म के समय व बाद में जिसने हमारा सम्हाल किया वह हमारा दूसरा गुरु है | तीसर गुरु नाम जो धारा | सोइ नाम से जगत पुकारा || जिसने हमारा नामकरण किया वह तीसरा गुरु है | चौंथा गुरु जो शिक्षा दीन्हा | तब संसारी मारग चीन्हा || हमें शिक्षा देने वालेअध्यापक चौंथे गुरु कीश्रेंणी में है | पॉचवा गुरु जो दीक्षा दीन्हा | राम कृष्ण का सुमिरण कीन्हा || हमें अध्यात्म से जोड़ने में पॉचवे गुरु का बहूँत ही महत्वपूर्ण योगदान है क्यों कि यही वह सीढ़ी है जहॉ से हम भगवान की ओर प्रथम कदम उठाते हैं और नाना प्रकार के देवी देवताओं (३३करोंड़) को पूजना शुरू करते हैं। नाना प्रकार के व्रत जैसे चतुर्थी, नवमी, एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा आदि व्रतों को करते हूऐ मंदिर, पहाड़, पशु, पक्षी, पेड़, पौधे पूजन के अलावा तीर्थाटन आदि करके खुद को मुक्त मानते हैं।लेकिन उपरोक्त पूजाओं का प्रमाण गीता व् वेदों में न होने से शास्त्रविरुध साधना है।जिस कारण इन पूजाओं का फल गीता जी में व्यर्थ कहा है। (गीता अ.१६ मंत्र २३-२४) इस कारण इन साधनाओं को करके भी शास्त्रविरुध् होने से भगति में हम सफल नही हो पाते। आगे छठवॉ गुरु को समझें : छठवॉ गुरु भरम सब तोड़ा, "ऊँ" कार से नाता जोंड़ा । यह गुरु हमारा भरम निवारण इस आधार पर करता है कि वेद (यजुर्वेद अ.४० मंत्र १५ व १७) और गीता (अ.८ मंत्र १३) में केवल एक "ऊँ" अक्षर ब्रम्ह प्राप्ति (मुक्ति) हेतु बताया गया है। इसके अलावा किसी अन्य देवी देवता की पूजा नही करनी चाहिए। किंतु, इनका यह भक्ति साधना भी पूर्ण लाभदायक नही है। क्योकि गीता ज्ञानदाता (ब्रम्ह) स्वयं गीता में कहता है कि तेरे और मेरे अनेक जन्म हो चुके हैं (प्रमाण- गीता अ.२ मं.१२, अ.४ मं.५ व ९ तथा अ.१० मं.२)। और यह भी स्पष्ट बता दिया कि ब्रम्ह लोक पर्यन्त सब लोक पुनरावृत्ती (उत्पति विनाश) में है (अ.8 म.16) । इसलिए यह गुरू भी पूर्ण नहीं। अब सातवॉ गुरु : सातवॉ सतगुरू शब्द लखाया, जहॉ का जीव तहॉ पहूँचाया । पुन्यात्माओं, इन्हें गुरु नही, अपितु सतगुरु कहा गया है। क्योंकि इनका दिया ज्ञान व भक्ति विधि शास्त्रानुकूल होने से इस लोक और परलोक - दोनो में परम हितकारक है। यह सतगुरु हमें सदभक्ति का दान देकर व हमारा सही ठिकाना बताकर यहॉ काल/ब्रम्ह के २१ ब्रम्हांड से भी और उस पार उस सतलोक को प्राप्त करने की सतसाधना प्रदान करता है जिस मार्ग पर चलने वाला साधक जरा और मरण रुपी महा भयंकर रोग से छुटकारा पाकर उस शास्वत स्थान को प्राप्त करता है, जिस स्थान के बारे में गीता अ.१८ मं.६२ व ६६ में कहा गया है। इसी सतगुरु का संकेत गीता अ.4 के मन्त्र 34 में किया है। और यही सतगुरु ही वह बाखबर है, जिसके बारे में पवित्र कुर्आन शरीफ की सूरत फूर्कानी २५ आयत ५२ से ५९ में भी बताया गया है । अब पुन्यात्माओं, हमें इस सतगुरु/बाखबर की खोज करनी है। दुनिया के सभी संतों, महंतों, गुरुओं को इस पैमाने पर तौलकर देखें तो आपको केवल और केवल एक ही ऐसा संत नजर आएगा जिसके ग्यान का प्रत्युत्तर वर्तमान का कोई भी संत नही दे सका और वह परम संत हैं- "जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज" इस महान संत का आध्यात्मिक मंगल प्रवचन "साधना चैनल" पर प्रतिदिन सायं 07:40 से 08:40 पर प्रसारित होता है/dd direct 32/tata सकाई 191/बिग TV 655/एयरटेल 685/डिश TV 2055/जरुर सुनें और अपना कल्याण कराऐं। अब ज्यादा कुछ कहने को नही बचा।। परमात्मा कहते हैं : समझा है तो सिर धर पॉव, बहूर नहीं रे ऐसा दॉव । सत साहेब👏👏🌹🌹