बुधवार, 20 अप्रैल 2016

गायत्री मंत्र की सच्चाई


#गायत्री मंत्र हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध मंत्रों में से एक है। माना जाता है की ये मंत्र #तैत्तिरीय #आरण्यक नामक ग्रन्थ से लिया गया है, और यही वो ग्रन्थ है जिसमें इस मंत्र का गलत वर्णन किया गया है। जबकि वास्तविक सही मंत्र यजुर्वेद में वर्णित है, और इसके सामने #ॐ नहीं है। इस मंत्र में "ॐ" का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है। वास्तव में "ॐ" लगाने से ये मंत्र उनुपयोगी हो जाता है। वास्तविक मंत्र - "#यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3" #भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात्॥ अर्थ - वेद ज्ञान दाता ब्रह्म कह रहा है की (स्व:) अपने निज सुखमय (भुव:) अंतरिक्ष अर्थात सतलोक में (भू:) स्वयं प्रकट होने वाला पूर्ण परमात्मा है। वही (सवितु:) सर्व सुख दायक सर्व का उत्पन्न करने वाला #परमात्मा है। (तत्) उस परोक्ष अर्थात अव्यक्त साकार (वरेण्यम) सर्वश्रेष्ठ (भर्ग:) तेजोमय शरीर युक्त सर्व सृष्टि रचनहार (देवस्य) परमेश्वर की (धीमही) प्रार्थना, उपासना, #शास्त्रानुकूल विधि से करें, (य:) जो परमात्मा सर्व का पालन करता है, वह (न:) हम को भ्रम रहित (धीय:) शास्त्रानुकूल सत्य भक्ति, बुद्धिमता अर्थात सदभाव से करने की (प्रचोदयात) प्रेरणा करे। पवित्र #गीता के अध्याय 8 श्लोक 13 के अनुसार "#ॐ" मंत्र केवल "ब्रह्म" की प्राप्ति का मंत्र है, और हम जानते हैं की वेदों में "परम अक्षर ब्रह्म" अर्थात "पूर्ण परमात्मा" की महिमा का वर्णन किया गया है । यजुर्वेद के इस मंत्र में भी सर्व शक्तिमान, पूर्ण ब्रह्म #कबीर परमेश्वर की प्रशंसा की गयी है, इसलिए इसके आगे ब्रह्म का मंत्र(ॐ) लगाना ऐसा है, जैसे "प्रधान मंत्री" को "मुख्य मंत्री" कह कर उनका अपमान करना। सत साहेब

मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

गुरू का आदेश सर्वोपरि है।


कागभुसंड जी अपने पूर्व जन्म की कथा गरूड़ देव को सुनाते हुए बताते हैं- एक बार जब वे कथा कर रहे थे तब उनके गुरूजी उनके सामने से चले गए पर कागभुसंड जी ने अभिमानवश खडे होकर गुरूदेव का अभिनंदन नहीं किया। इस पर उनके इष्ट देव शिव जी को इतना क्रोध आया कि उन्होने आकाशवाणी कर कागभुसंड जी को एक साल तक नरक भोगने का श्राप दे दिया। ये भविष्यवाणी गुरूदेव ने भी सुनी। फिर उन्होने शिव जी से श्राप वापिस लेने के लिए मिन्नतें की। गुरूजी की प्रार्थनाओं से प्रसन्न होकर शिवजी ने कहा कि कागभुसंड जी को एक साल तक नरक में रहने का श्राप तो भोगना ही पडेगा परन्तु मेरी कृपा से वहां यमदूत उन्हें तंग नहीं करेंगे। ऐसा ही हुआ। इष्टदेव यह देखते हैं कि मेरे प्रतिनिधि संत के साथ मेरा भक्त कैसा व्यवहार करेगा। अगर इस संत की जगह मैं होता तो मेरे साथ भी इसका व्यवहार ऐसा ही रहता। इस तरह वह व्यक्ति जो गुरू का आदर नही करता, भगवान के दरबार से रीजेक्ट कर दिया जाता है। #कबीर_परमात्मा_कहते_हैं- गुरू गोविन्द कर जानिए, रहिए शब्द समाए। मिले तो दण्डवत बंदगी, नहीं तो पल पल ध्यान लगाए। जय बन्दीछोड की। सत साहेब जी।

सोमवार, 18 अप्रैल 2016

एक संत ऐसा


एक प्रसिद्ध संत थे जिन की प्रसिद्धि का बोलबाला निरंतर बढ़ता जा रहा था। वे लोगों की बुराई और समाज की दशा को सुधारने का अनमोल कार्य कर रहे थे। उन्होंने सभी धर्म गुरुओं को सादर आमंत्रित किया अपने साथ ज्ञान चर्चा करने के लिए ताकि सभी मिलकर एक परमात्मा को पा सके और यथार्थ भक्ति विधि अपना सकेँ। परन्तु उन नकली धर्म गुरुओं को यह मंजूर नहीं था। उन्हें परमात्मा प्राप्ति की बजाए भक्तों की बढ़ती संख्या ज्यादा अच्छी लगती थी। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई। उस संत को बदनाम करने की योजना। योजना के तहत उस संत को बदनाम किया गया। उन पर मिथ्या आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। दो साल जेल में रहने के बाद संत बेल पर रिहा हुए। इतने आरोपों के बावजूद उस संत के समर्थक लगातार बढ़ते ही जा रहे थे। उन पर उन झूठे आरोपों का कोई प्रभाव नहीँ पड़ रहा था क्योंकि वह संत व उनके ज्ञान को अच्छी तरह समझ चुके थे। कोर्ट की तारीखें अब भी पड़ती थी। उन संत के केस की सुनवाई करने वाला जज भ्रष्टाचारी निकला। उसने संत से कहा अगर केस फारीक करवाना हो तो 30 लाख रुपए दे दें। इस पर संत ने साफ इनकार कर दिया। संत ने कहा जब मैं अपने शिष्यों को रिश्वत लेने व देने से मना करता हूँ तो मैं स्वयं आप को रिश्वत कैसे दे सकता हूँ। इस पर जज ने कडा रुख करके कहा देख लीजिए आपका आश्रम उठ जाएगा, कलम मेरे हाथ में है। संत ने जवाब दिया कि हम भगवान पर विश्वास करने वाले हैं। हम रिश्वत नहीं देंगे। आपको जो करना हो आप करें। जो भगवान को मंजूर होगा वह हो जाएगा। इस पर बौखलाए जज ने संत की हाजिरी माफी रद्द कर दी। संत ने इस बात के पर्चे छपवा कर सब को बताने की कोशिश की। इस बारे में किताबें तक छपी। संत ने कहा कि इस लालची जज ने जो निर्णय लेना था, वह ये पहले ही ले चुका है अब तारीख पर जाने से कोई फायदा नहीँ। राजा हरिश्चन्द्र ने अपने सत्य की सुरक्षा के लिए अपने राज्य का बलिदान दे दिया......लेकिन अंत मेँ जीत उसी की हुई। हम भी सत मार्ग से पीछे नहीं हटेंगे चाहे अब कुछ भी हो। उस भ्रष्टाचारी जज ने पैसे के लोभ में अंधा होकर उस संत के नोनबेलेबल वारंट जारी कर दिए। संत के समर्थक इस अन्याय को देखकर इसके खिलाफ शांति के प्रदर्शन पर उतर आए। उन्होंने काले कपड़े पहन कर इस भ्रष्टाचारी जज के खिलाफ शान्तिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया तथा हाथ में सफेद झंडे जो शांति का प्रतीक थे लिए हुए थे। जैसा कि सभी जानते है कि मीडिया आग में घी झौंकने का काम करती है। जो मसला आसानी से सुलझाया जा सकता था उसे इन मीडिया कर्मियों ने इतने गलत तरीके से दिखाया कि उस संत को ही सब गलत नजरिए से देखने लगे। जिस भ्रष्ट जज को सजा मिलनी चाहिये थी उसे तो महिमा का पात्र बना दिया गया और जो सतमार्ग पर चला व दूसरों को भी सच्चे मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया उन पर संगीन आरोप लगाकर जेल में डाल दिया। परन्तु उस महान संत के अनुयायी समाज को वास्तविकता से परिचित कराने के लिए बहुत प्रयत्न कर रहे हैं। और पूरे देश में शांतिप्रिय रैली धरना करके इस बरवाला केस की CBI जाँच की मांग कर रहे हैं। ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। इस कार्य के लिए आपका भी सहयोग चाहते हैं.......... आपसे करबद्ध प्रार्थना हैं हमारे केस की CBI जाँच की मांग में हमारा सहयोग दें। जो सरकार दहेज को नहीं रोक पाई, जो सरकार नशा नहीं रोक पाई उसको एक संत के महज विचारों ने रोक दिखाया लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों के कारण संत को परेशान किया गया है। संत बिल्कुल निर्दोष हैं। सरकारों व कुछ जजों द्वारा अलोकतान्त्रिक व असंवैधानिक कार्य किया जा रहा है। इस धटना की अधिक जानकारी के लिए विस्तार से पढ़े..."बरवाला की घटना की सच्चाई".....Pdf Download ...Link :-http://www.rsss.co.in/publications/ आप सभी से करबद्ध प्रार्थना है हमारे केस की CBI जाँच की मांग में हमारा सहयोग दें। आप सभी को सत् साहिब!!!

रविवार, 17 अप्रैल 2016

तीन देवों की जो करते भक्ति उनकी कभी न होवै मुक्ति


परमपिता परमात्मा सतगुरु हमें बताते हैं कि:- जब आज से ६०० वर्ष पहले इस कलयुग में स्वयं परमेश्वर कबीर साहेब आए थे तो उन्होने जो तत्व ग्यान हम तुच्छ जीवों को कहा/सुनाया था वह ज्यों की त्यों आज हमारे सभी सदग्रंथ समर्थन कर रहे हैं | परमेश्वर ने कहा था कि भक्ति अगर शास्त्रानुकूल न हो तो वह इस लोक व परलोक दोनो के लिए व्यर्थ है {गीता अ.१६श्लोक २३-२४} और कहा था कि कबीर, तीन देवों की जो करते भक्ति | उनकी कभी न होवै मुक्ति || इस का प्रमाण (गीता अ.७ श्लोक१२-१५) आगे परमेश्वर ने बताया कि:- सब आए उस एक से, डार पात फल फूल | कबीरा पीछे क्या रहा, गही पकड़ा जब मूल || एक साधे सब सधे, सब साधे सब जाय | माली सिंचै मूल को तो, फूलै फलै अघाय || अक्षर पुरुष एक पेंड़ है,क्षर पुरुष वाकी डार | तीनों देवा शाखा हैं, पात रुप संसार || इन सभी पदों का उल्लेख पवित्र सदग्रंथ श्रीमदभगवत गीता अ.१५ श्लोक-१से४ व १६-१७ में ज्यों की त्यों मिलता है | जिससे प्रमाणित होता है कि उस समय जो यह तत्वग्यान परमेश्वर कबीर जी द्वारा बोला गया ऐसा ग्यान बताने वाला कोई संत इस धरा/२१ब्रंहांड में नहीं था क्यों कि इस संसार रुपी उल्टे लटके हूए वृक्ष को जड़ से पत्ते तक की व्याख्या कोई भी संत नही कर सका और गीता अ.१५ श्लोक-१ कहती है कि जो इस उल्टे लटके हूए संसाररुपी वृक्ष के सभी विभागों को तत्व से जानता है वह तत्वदर्शी संत है और गीता अ.४ श्लोक-३४ में गीता ग्यानदाता यह भी कहता है कि उस तत्वग्यान को तू तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर उसके बताए अनुसार भक्ति कर | परमात्मा ने कहा है :- कबीर, बंधे को बंधा मिला, छूटे कौन उपाय | कर सेवा निरबंध की, वो पल में लेय छुड़ाय || वो तो स्वयं परमात्मा थे, तत्वदर्शी संत थे, निरबंध थे जो हमें सतभक्ति, सतसाधना बताकर यह सिध्द करके दिखाए कि हमें सिर्फ जड़/मूल (पूर्ण परमात्मा) की ही भक्ति साधना करनी चाहिए | वर्तमान में पूरण परमात्मा के उस सत भक्ति शास्त्रानुकूल साधना को बताने वाला इस धरा में केवल एक ही संत है- "जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज" आप वास्तव में परमात्मा / सतभक्ति / सतसाधना / मोक्ष पाना चाहते हैं तो सत्य को परखिए दुनिया की बातों में न आइये स्वयं जॉचिए अगर आप निष्पक्ष भाव व आत्म कल्याण को उद्देश्य रखकर सत्य को ढूँढेंगे तो परमात्मा आपको सत्य तक पहूँचने में मदद करेगा | बार बार ऐसा अवसर नही आता भक्तों पहचान लो इस संत स्वरुप परमात्मा को | इनके तत्वग्यान का उत्तर आज भी इस धरा में किसी संतों के पास नहीं है | इस तत्वग्यान को धारण करो और अपना कल्याण करो, परमात्मा कहते हैं- यह संसार समंझदा नाहीं, कहंदा शाम दोपहरे नूँ | गरीबदास ये वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूँ || समझा है तो सिर धर पॉव | बहूर नहीं रे ऐसा दॉव || ||∆ सत साहेब ∆||

एक ऐसा भक्त समाज सन्त रामपाल जी की अध्यक्षता में


परमेश्वर की रजा से "संत रामपाल जी एक ऐसा भक्त समाज तैयार कर रहे, है जिसको वास्तव में सभ्यता कहा जा सकता है, और हम खुश किस्मत है कि भारत ही वो देश बनेगा जिसका दुनिया में कोई जबाब नहीं होगा! ऐसा समाज जिस में सम्मिलित हर भक्त हर एक नियम का सम्मान करता है । जो उन चीजों को अपने दामन को छूने भी नहीं देता जो बुराई से भरपूर हों! "गम भी उन से आकर कहे भाई मुझे माफ करना में गलत जगह अपना घर बनाये बैठा हूँ" ऐसा समाज जिसमें हर एक नारी का सम्मान बनावटी नहीं,ऐसा समाज जिसमें पाप नहीं,ऐसा समाज जिसमें हर एक व्यक्ति के प्रति सभ्यता का परिचय देते है, कोई भी ऐसी वस्तु नहीं जो नशे से सम्बंध रखती है! भक्तों के पाँव में रहने के लायक भी नहीं,नशा लोगों को ऐसी ऐसी चीजें करवाता है! जिसे सोचकर लोंगों का दिल दहल जाता है, लेकिन संत रामपाल जी का भक्त समाज इस नशे को ऐसे लात मारता है,जैसे कोई फुटवाल हो,क्योंकि "कहता तो हर संत है नशा छोडो लेकिन छोडता कोई नहीं" ऐसे दिखाने के लिए आज जो भी लोग ये कह रहें है,वो ऐसे है वो वैसे हैे!"तो गौर से समझना इस बात को जो में कह रहा हूँ!"जैसे आप कोई भी चीज बाजार में खरीदने (कपडे,गहने,फ्रिज,कूलर,या कोई भी सामान)जाओ तो आप पहले पूछोगे भाई कितने का है! कैसा है कम्पनी का है या नहीं क्या आप बिना जाने बिना तहकीकात करें उसे खरीद सकते है! जाँचोंगें परखोगे तभी तो खरीदोगे"बस में इतना ही कहना चाहता हूँ कि पहले आप संत रामपाल को समझें,जाँचें वो क्या कह रहे है! और क्यों कह रहे है! आज भारत वर्ष में उनके ज्ञान का सामना करना किसी संत के बस की बात नहीं! १.जब मुसलमान धर्म के प्रवक्ता डा. जाकिर नायक ने विश्व के सभी धर्म गुरूओं को चुनौती दी थी के मेरे जैसा ज्ञान किसी के पास नहीं, और है तो' ज्ञान चर्चा करो मुझसे तब सभी संत कहाँ थे अपने आप को संत कहने वालों का ज्ञान कहाँ गया था!"उस समय भारत वर्ष में केवल एक संत रामपाल जी ने उसके चैलेंज को स्वीकार किया था! पर इसकी हिम्मत नहीं हुई ज्ञान चर्चा की । २.भारत के ये संत' भागवत कथा माँ के पेट से सीख कर नहीं आये! इन्हों ने पढा तो वेदों और गीता से है! पर ज्ञान हमें कुछ और दे रहे है और अपने आप को ज्ञानी कह रहे है!जबकि हमारे सदग्रन्थं तो कुछ और ही कह रहें है!आप भी सही ज्ञान समझ सकते है स्वयं पंडित साधारण इन्सान ही है!क्या हम में इतनी बुध्दी नहीं! ३.आज वो समय भी है समझाने वाला भी है,मनुष्य जन्म भी है,ऐसा मौका अपने हाथ से ना खोंये अपने इसी जीवन को सफल बनाये । छोडो इस लोक को जहाँ हमेशा ये जरा(वृध्द अवस्था) मरण (मृत्यु) बना रहेगा करोडों जन्म हो गये यहाँ भटकते हुए यहाँ सबकी दुर्गती बनी ही रहेगी!जैसे हम अपने घर को छोडकर कहीं बाहर चले जाये घूमने के लिए तो वहीं के नहीं हो जाते! हमें लौट कर अपने घर वापस जाना होता है! बस इसी प्रकार हमेें अपने घर वापिस लौटना है!क्योकिं बाहर कितना भी आदमी घूम ले उसे सुख अपने घर में ही मिलता है वो सुविधा अपने घर में ही मिलती है। "कबीर साहिब" "अमर करू सतलोक(अमरलोक)पठाऊँ" "तातें बंदी छोड़ कहाऊँ" सत् साहेब..

600 साल पहले कबीर साहेब ने क्या बताया


परमपिता परमात्मा सतगुरु हमें बताते हैं कि:- जब आज से ६०० वर्ष पहले इस कलयुग में स्वयं परमेश्वर कबीर साहेब आए थे तो उन्होने जो तत्व ग्यान हम तुच्छ जीवों को कहा/सुनाया था वह ज्यों की त्यों आज हमारे सभी सदग्रंथ समर्थन कर रहे हैं | परमेश्वर ने कहा था कि भक्ति अगर शास्त्रानुकूल न हो तो वह इस लोक व परलोक दोनो के लिए व्यर्थ है {गीता अ.१६ श्लोक २३-२४} और कहा था कि कबीर, तीन देवों की जो करते भक्ति | उनकी कभी न होवै मुक्ति || इस का प्रमाण (गीता अ.७ श्लोक१२-१५) आगे परमेश्वर ने बताया कि:- सब आए उस एक से, डार पात फल फूल | कबीरा पीछे क्या रहा, गही पकड़ा जब मूल || एक साधे सब सधे, सब साधे सब जाय | माली सिंचै मूल को तो, फूलै फलै अघाय || अक्षर पुरुष एक पेंड़ है,क्षर पुरुष वाकी डार | तीनों देवा शाखा हैं, पात रुप संसार || इन सभी पदों का उल्लेख पवित्र सदग्रंथ श्रीमदभगवत गीता अ.१५ श्लोक-१से४ व १६-१७ में ज्यों की त्यों मिलता है | जिससे प्रमाणित होता है कि उस समय जो यह तत्वग्यान परमेश्वर कबीर जी द्वारा बोला गया ऐसा ग्यान बताने वाला कोई संत इस धरा/२१ब्रंहांड में नहीं था क्यों कि इस संसार रुपी उल्टे लटके हूए वृक्ष को जड़ से पत्ते तक की व्याख्या कोई भी संत नही कर सका और गीता अ.१५ श्लोक-१ कहती है कि जो इस उल्टे लटके हूए संसाररुपी वृक्ष के सभी विभागों को तत्व से जानता है वह तत्वदर्शी संत है और गीता अ.४ श्लोक-३४ में गीता ग्यानदाता यह भी कहता है कि उस तत्वग्यान को तू तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर उसके बताए अनुसार भक्ति कर | परमात्मा ने कहा है :- कबीर, बंधे को बंधा मिला, छूटे कौन उपाय | कर सेवा निरबंध की, वो पल में लेय छुड़ाय || वो तो स्वयं परमात्मा थे, तत्वदर्शी संत थे, निरबंध थे जो हमें सतभक्ति, सतसाधना बताकर यह सिध्द करके दिखाए कि हमें सिर्फ जड़/मूल (पूर्ण परमात्मा) की ही भक्ति साधना करनी चाहिए | वर्तमान में पूरण परमात्मा के उस सत भक्ति शास्त्रानुकूल साधना को बताने वाला इस धरा में केवल एक ही संत है- "जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज" आप वास्तव में परमात्मा / सतभक्ति / सतसाधना / मोक्ष पाना चाहते हैं तो सत्य को परखिए दुनिया की बातों में न आइये स्वयं जॉचिए अगर आप निष्पक्ष भाव व आत्म कल्याण को उद्देश्य रखकर सत्य को ढूँढेंगे तो परमात्मा आपको सत्य तक पहूँचने में मदद करेगा | बार बार ऐसा अवसर नही आता भक्तों पहचान लो इस संत स्वरुप परमात्मा को | इनके तत्वग्यान का उत्तर आज भी इस धरा में किसी संतों के पास नहीं है | इस तत्वग्यान को धारण करो और अपना कल्याण करो, परमात्मा कहते हैं- यह संसार समंझदा नाहीं, कहंदा शाम दोपहरे नूँ | गरीबदास ये वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूँ || समझा है तो सिर धर पॉव | बहूर नहीं रे ऐसा दॉव || ||∆ सत साहेब ∆||

सत्गुरू पुरुष कबीर हैं


सत् साहेब सतगुरु देव की जय Kabir Is God- सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। -गरीबदास जी और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।। -दादु दयाल जी वाणी अरबो खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार। करता पुरुष कबीर, रहै नाभे विचार।। -नाभादास जी साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल। ज्ञान गम्या से देदीया, कहै रैदास दयाल॥ -रैदास जी नौ नाथ चौरसी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान। अवीचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥ -गोरखनाथ जी खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥ काइम दिइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥ सयदे (सजदे) करे खुदाई नू आलम बडा कबीर॥ -नानक जी बाजा बाजा रहितका, परा नगरमे शोर। सतगुरू खसम कबीर है, नजर न आवै और॥ -धर्मदास जी सन्त अनेक सन्सार मे, सतगुरू सत्य कबीर। जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥ -जगजीवन जी तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश। कहै रामानन्द निज ब्रह्म तुम, हमरा दुढ विश्वास।। -रामानन्द जी कबीर इस संसार को, समझांऊ के बार । पूंछ जो पकङे भेड़ की, उतरया चाहे पार ॥ -कबीर साहेब** सत् साहेब..

पाखण्ड का अन्त


©कबीर की अन्धविश्वास, पाखंड, भेदभाव, जातिप्रथा, हिन्दू, मुस्लिम पर करारी चोट !!© ” जो तूं ब्रह्मण , ब्राह्मणी का जाया ! आन बाट काहे नहीं आया !! ” – कबीर (अर्थ- अपने आप को ब्राह्मण होने पर गर्व करने वाले ज़रा यह तो बताओ की जो तुम अपने आप की महान कहते तो फिर तुम किसी अन्य रास्ते से जाँ तरीके से पैदा क्यों नहीं हुआ ? जिस रास्ते से हम सब पैदा हुए हैं, तुम भी उसी रास्ते से ही क्यों पैदा हुए है ?) कोई आज यही बात बोलने की ‘हिम्मंत’ भी नहीं करता ओर कबीर सदियों पहले कह गए ।। हमे गर्व हैं की हम उस महान संत के अनुयाई हैं । ऐसे महान क्रांतिकारी संत को कोटी कोटि नमन !!! “लाडू लावन लापसी ,पूजा चढ़े अपार पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुह छार !!” – कबीर (अर्थ – आप जो भगवान् के नाम पर मंदिरों में दूध, दही, मख्कन, घी, तेल, सोना, चाँदी, हीरे, मोती, कपडे, वेज़- नॉनवेज़ , दारू-शारू, भाँग, मेकअप सामान, चिल्लर, चेक, केश इत्यादि माल जो चढाते हो, क्या वह बरोबर आपके भगवान् तक जा रहा है क्या ?? आपका यह माल कितना % भगवान् तक जाता है ? ओर कितना % बीच में ही गोल हो रहा है ? या फिर आपके भगवान तक आपके चड़ाए गए माल का कुछ भी नही पहुँचता ! अगर कुछ भी नही पहुँच रहा तो फिर घोटाला कहा हो रहा है ? ओर घोटाला कौन कर रहा है ? सदियों पहले दुनिया के इस सबसे बड़े घोटाले पर कबीर की नज़र पड़ी | कबीर ने बताया आप यह सारा माल ब्राह्मण पुजारी ले जाता है ,और भगवान् को कुछ नहीं मिलता, इसलिए मंदिरों में ब्राह्मणों को दान करना बंद करो ) ‪#‎अन्धविश्वास_पर_कबीर_की_चोट‬ !! ‪#‎हिन्दुओ_पर‬ ”पाथर पूजे हरी मिले, तो मै पूजू पहाड़ ! घर की चक्की कोई न पूजे, जाको पीस खाए संसार !!” – कबीर ”मुंड मुड़या हरि मिलें ,सब कोई लेई मुड़ाय | बार -बार के मुड़ते ,भेंड़ा न बैकुण्ठ जाय ||” – कबीर ”माटी का एक नाग बनाके, पुजे लोग लुगाया ! जिंदा नाग जब घर मे निकले, ले लाठी धमकाया !!” – कबीर ” जिंदा बाप कोई न पुजे, मरे बाद पुजवाये ! मुठ्ठी भर चावल लेके, कौवे को बाप बनाय !! – कबीर ”हमने देखा एक अजूबा ,मुर्दा रोटी खाए , समझाने से समझत नहीं ,लात पड़े चिल्लाये !!” – कबीर ‪#‎मुसलमानों_पर‬ ”कांकर पाथर जोरि के ,मस्जिद लई चुनाय | ता उपर मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय ||” – कबीर ‪#‎हिन्दू_मुस्लिम_दोनों_पर‬ ”हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना, आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।” – कबीर (अर्थ : कबीर कहते हैं कि हिन्दू राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है. इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।) ‪#‎हिन्दुओ_की_जाति_पर_कबीर_की_चोट‬ ”जाति ना पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान ! मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान !! – कबीर ”काहे को कीजै पांडे छूत विचार। छूत ही ते उपजा सब संसार ।। हमरे कैसे लोहू तुम्हारे कैसे दूध। तुम कैसे बाह्मन पांडे, हम कैसे सूद।।” – कबीर ”कबीरा कुंआ एक हैं, पानी भरैं अनेक । बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक ॥” – कबीर ”एक क्ष ,एकै मल मुतर, एक चाम ,एक गुदा । एक जोती से सब उतपना, कौन बामन कौन शूद ” – कबीर ‪#‎कबीर_की_सबको_सीख‬ ‪#‎बाकि_समझ_अपनी_अपनी‬ ”जैसे तिल में तेल है, ज्यों चकमक में आग I तेरा साईं तुझमें है , तू जाग सके तो जाग II ” – कबीर मोको कहाँ ढूंढे रे बन्दे , मैं तो तेरे पास में। ना मैं तीरथ में, ना मैं मुरत में, ना एकांत निवास में । ना मंदिर में , ना मस्जिद में, ना काबे , ना कैलाश में।। ना मैं जप में, ना मैं तप में, ना बरत ना उपवास में ।।। ना मैं क्रिया करम में, ना मैं जोग सन्यास में।। खोजी हो तो तुरंत मिल जाऊ, इक पल की तलाश में ।। कहत कबीर सुनो भई साधू, मैं तो तेरे पास में बन्दे… मैं तो तेरे पास में….. – कबीर

मीडिया कितना सच बोलता है


सबके लिए एक जरूरी संदेश... आप सभी जानते है कि Media में और Newspapers में एक बार जो बात आ गई, वो आग की तरह पूरी दुनिया में फैल जाती है ! Media कितना सच बोलता है, इसकी जाँच कोई नहीं करता, क्यूँकि सच कोई जानना नहीं चाहता, मेंहनत कौन करें, क्या करना सच जानकर Media ने जो कह दिया वो ही सच है, आजकल का पढा-लिखा समाज यही सोचता है, सच्चाई की तह तक कोई जाना नहीं चाहता !! मैं एक संत के बारे आपको कुछ बताना चाहूँगा, ये दुनिया में सबसे विवादित संत माने जाते हैं, वर्तमान में झूठा देशद्रोह का केस बनाकर इन्हे जेल भेज दिया गया है, Media ने झूठी खबरें बना-बनाकर इनको बदनाम करने की भरपूर कोशिश की है, दुनिया सच्चाई ना देखकर Media की बेतुकी और बिना सर-पैर की बातों में आकर उस संत को गालियाँ देती है, उनको भला-बुरा कहती है ! लेकिन कहते हैं ना कि सच को कुछ देर दबाया जा सकता है, लेकिन सच को झुठलाया नहीं जा सकता, सच एक दिन बाहर निकल के ही रहता है, वो दिन जल्द ही नजदीक आ रहा है, झूठ का पर्दाफाश होगा और सच सबके सामने होगा !! एक संत की पहचान उसके ज्ञान से होती है, उसकी दी गई शिक्षा के आधार से होती है, सदग्रन्थों में संत के बारे में लिखी पहचान से होती है, ना कि किसी Media या Newspaper की बकवास बातों से, Media अपनी TNP बढाने के लिए एक सच्चे इंसान को झूठा बना देता है और मूर्ख लोग Media को पूरा सच मान लेते हैं ! मैं आप सबसे हाथ जोडकर निवेदन करता हूँ, संत चाहे कोई भी हो उसकी पहचान केवल उसके ज्ञान से करो, किसी Media या Newspaper की बातों में आकर संत को गाली मत दो, क्या पता भगवान किस रूप में धरती पर बैठा हो और उसकी क्या लीला चल रही है कोई नहीं जान सकता !! संत की पहचान करनी है तो एक बार अपने सदग्रन्थों को ध्यान से देखो, धार्मिक किताबों को पढो, जिस संत का ज्ञान इनके अनुसार होगा वो सच्चा संत होगा ! आपके पास कोई भी सदग्रन्थ नहीं है और आप जानना चाहते हैं कि सभी धर्मों के धर्मग्रन्थ क्या कहते हैं, इनके क्या विचार हैं !! जानने के लिए अवश्य पढिये "" ज्ञान-गंगा"" पुस्तक ( इसमें सभी धर्मों के सदग्रन्थों श्रीमदभगवदगीता, चारों वेद, अठारह पुराण, बाईबिल, कुरान, गुरूग्रन्थसाहिब आदि का सारांश है, प्रमाण सहित ) आप सत्संग भी देख सकते हैं साधना चैनल शाम 07.40 से 08.40 तक आपको सारे सवालों का जबाव सत्संग के माध्यम से आपको मिलेगा !! 🙏🏻 🙏🏻 "" सत् साहेब जी ""🙏🏻🙏🏻

शनिवार, 16 अप्रैल 2016

बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं


आखिर क्यूँ ?? कभी सोचा है आपने....?? हम मन्दिर जाते, मस्जिद जाते,चर्च जाते-- फिर भी दुखी 😔😔 हम सभी देवी-देवताओं को पूजते हैं-- फिर भी दुखी और घर में क्लेश 😔😔 हम गुरू भी बनाते हैं-- फिर भी कैंसर, टी.बी., स्वाइन फ्लू, एड्स, कोमा, पथरी, शुगर जैसी आदि खतरनाक बिमारियाँ हमें होती है 😔😔 हम दान भी देते हैं, जो हमारे बाह्मण-पंडित, काजी-मुल्ला बताते है, वो सब करते हैं-- फिर भी हमारी अकाल मौत और गरीबी से तंग, रोजी-रोटी को परेशान 😔😔 हमने व्रत किये, रोजे किये, तीर्थ किये, मक्का-मदीना किये-- फिर भी हमारी आँखों के सामने बाप से पहले बेटे-बेटी की अकाल मृत्यू, पत्नी से पहले पति की मृत्यू, दुर्घटना में पूरा परिवार ही खत्म..😔😔😭😭 Note:- कभी सोचा है:- क्यों होता है ऐसा....आखिर क्यों????? आखिर क्यूँ, आखिर क्यूँ ,आखिर क्यूँ ??????? क्यूँ, क्यूँ, क्यूँ ?????????? आप जानना चाहते हैं, इन सभी सवालों के जबाव...और जीवन की इन सभी समस्याओं से छुटकारा..अर्थात् मोक्ष तो अवश्य देखिये....साधना चैनल शाम 07.40 से 08.40 तक संत रामपाल जी महाराज के अमृत प्रवचन... Note:- संत जी के प्रवचन रोजाना जरूर देखे, क्यूँकि पहली बार देखने से जो शंकाएँ आपके मन में उठेंगी, उन सभी शंकाओं का समाधान प्रवचन रोजाना देखने पर ही होगा... सभी भगत आत्माओं से निवेदन है-- परमात्मा के इस Msg को Facebook, twitter,whtsapp, Newspaper etc. में ज्यादा से ज्यादा Share करें ! सत् साहेब जी..🙏🏻🙏🏻

माता के नवरात्रि

माता की नवरात्रि ,,, जी हाँ पूरे भारत में माता के नवरात्रों का दौर चल रहा है और भोला भला समाज व्रत और जागरण करवा कर अपने उद्धार की सोच रहा हैं पर आप को एक बात बता दें कि इस तरह से आपका उद्धार हो या ना हो पर नकली पुजारियों , पांडो का उद्धार जरूर है, शायद आपको बुरा लगे पर एक बार पोस्ट को पूरा पढ़ लें फिर विचार करें I ,,, हमारे कल्याण का मार्ग हमारे धर्म ग्रंथो और शास्त्रों में लिखा है और गीता जी के अध्याय न. 16 के श्लोक 23 में सपष्ट लिखा हैं कि अर्जुन शास्त्र विधि को त्याग कर जो लोग मनमाना आचरण करते हैं उन्हें कोई लाभ नहीं होता और विचार करने की बात भी हैं कि इन पुजारियों द्वारा प्राचीन काल से ही नवरात्रे और ना जाने कौन कौन से व्रत रखवाएं जा रहे हैं पर ना तो मेरे भारत देश में उन्नति हुयी हैं और ना गरीब का भला हुआ हैं बल्कि और भी ज्यादा पतन हो गया है I , आप सभी अपने आप को पढ़ा लिखा मानते हो बाजार से सब्जी भी लाते हो तो विचार करते हो कि ये खराब न हो तो फिर भगती मार्ग में इतनी सुस्ती क्यूँ कोई जैसा कह देता है कर देते हो विचार करने वाली बात है हमारे पवित्र ग्रन्थ गीता में अर्जुन को श्री कृष्ण जी कहते हैं कि : ,,,, अर्जुन न तो ज्यादा खाने वाले का और न ही बिलकुल न खाने वाले का , और न ज्यादा सोने वाले का और नही ज्यादा जागने वाले का ये योग सफल होता हैं तो फिर व्रत किस लिए I ,,,, एक बात और नवरात्रे तो 9 दिन के होते हैं पर साल में 365 दिन होते हैं बाकी के दिन वो माँ को कैसे मनाते हो और यहाँ तक कि कुछ मुर्ख तो ऐसे हैं सारा साल शराब पीते हैं और इन दिनों में अपने आप को महा ज्ञानी समझ बैठते हैं ये कोई बात हैं I ,,, नानक जी ने गुरु ग्रन्थ साहेब में लिखा हैं कि रखे व्रत ते छोड़े अन्न , ना ओह सुहागन न ओह रन्न II यानी व्रत रखने वाले और अन्न छोड़ने वाले पाखंडी हैं उन्हें भगवान् से क्या लेना ,,,, यहाँ तक कि महात्मा वुद्ध जैसे महापुरुषों ने बारह साल तक व्रत रखा और अंत में एक ही बात बोली : STARVATION COULD NOT LEAD TO SALVATION भूखा मरने से उद्धार नहीं होता I इसलिए मैं अपने पढ़े लिखे भाई बहनों से उम्मीद करता हूँ कि वो इस विषय में सोचे अपने ग्रंथो को पढ़े अगर आप वास्तव में शिक्षित है तो सोचें और अगर नहीं हैं तो किसी पढ़े लिखे से पूछ लें I सत साहेब II