कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है। वास्तव में "ॐ" लगाने से ये मंत्र उनुपयोगी हो जाता है।
वास्तविक मंत्र - "#यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3"
#भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात्॥
अर्थ - वेद ज्ञान दाता ब्रह्म कह रहा है की (स्व:) अपने निज सुखमय (भुव:) अंतरिक्ष अर्थात सतलोक में (भू:) स्वयं प्रकट होने वाला पूर्ण परमात्मा है। वही (सवितु:) सर्व सुख दायक सर्व का उत्पन्न करने वाला #परमात्मा है। (तत्) उस परोक्ष अर्थात अव्यक्त साकार (वरेण्यम) सर्वश्रेष्ठ (भर्ग:) तेजोमय शरीर युक्त सर्व सृष्टि रचनहार (देवस्य) परमेश्वर की (धीमही) प्रार्थना, उपासना, #शास्त्रानुकूल विधि से करें, (य:) जो परमात्मा सर्व का पालन करता है, वह (न:) हम को भ्रम रहित (धीय:) शास्त्रानुकूल सत्य भक्ति, बुद्धिमता अर्थात सदभाव से करने की (प्रचोदयात) प्रेरणा करे।
पवित्र #गीता के अध्याय 8 श्लोक 13 के अनुसार "#ॐ" मंत्र केवल "ब्रह्म" की प्राप्ति का मंत्र है, और हम जानते हैं की वेदों में "परम अक्षर ब्रह्म" अर्थात "पूर्ण परमात्मा" की महिमा का वर्णन किया गया है । यजुर्वेद के इस मंत्र में भी सर्व शक्तिमान, पूर्ण ब्रह्म #कबीर परमेश्वर की प्रशंसा की गयी है, इसलिए इसके आगे ब्रह्म का मंत्र(ॐ) लगाना ऐसा है, जैसे "प्रधान मंत्री" को "मुख्य मंत्री" कह कर उनका अपमान करना।
सत साहेब
बुधवार, 20 अप्रैल 2016
गायत्री मंत्र की सच्चाई
कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है। वास्तव में "ॐ" लगाने से ये मंत्र उनुपयोगी हो जाता है।
वास्तविक मंत्र - "#यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3"
#भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात्॥
अर्थ - वेद ज्ञान दाता ब्रह्म कह रहा है की (स्व:) अपने निज सुखमय (भुव:) अंतरिक्ष अर्थात सतलोक में (भू:) स्वयं प्रकट होने वाला पूर्ण परमात्मा है। वही (सवितु:) सर्व सुख दायक सर्व का उत्पन्न करने वाला #परमात्मा है। (तत्) उस परोक्ष अर्थात अव्यक्त साकार (वरेण्यम) सर्वश्रेष्ठ (भर्ग:) तेजोमय शरीर युक्त सर्व सृष्टि रचनहार (देवस्य) परमेश्वर की (धीमही) प्रार्थना, उपासना, #शास्त्रानुकूल विधि से करें, (य:) जो परमात्मा सर्व का पालन करता है, वह (न:) हम को भ्रम रहित (धीय:) शास्त्रानुकूल सत्य भक्ति, बुद्धिमता अर्थात सदभाव से करने की (प्रचोदयात) प्रेरणा करे।
पवित्र #गीता के अध्याय 8 श्लोक 13 के अनुसार "#ॐ" मंत्र केवल "ब्रह्म" की प्राप्ति का मंत्र है, और हम जानते हैं की वेदों में "परम अक्षर ब्रह्म" अर्थात "पूर्ण परमात्मा" की महिमा का वर्णन किया गया है । यजुर्वेद के इस मंत्र में भी सर्व शक्तिमान, पूर्ण ब्रह्म #कबीर परमेश्वर की प्रशंसा की गयी है, इसलिए इसके आगे ब्रह्म का मंत्र(ॐ) लगाना ऐसा है, जैसे "प्रधान मंत्री" को "मुख्य मंत्री" कह कर उनका अपमान करना।
सत साहेब
मंगलवार, 19 अप्रैल 2016
गुरू का आदेश सर्वोपरि है।
सोमवार, 18 अप्रैल 2016
एक संत ऐसा
रविवार, 17 अप्रैल 2016
तीन देवों की जो करते भक्ति उनकी कभी न होवै मुक्ति
एक ऐसा भक्त समाज सन्त रामपाल जी की अध्यक्षता में
600 साल पहले कबीर साहेब ने क्या बताया
सत्गुरू पुरुष कबीर हैं
सत् साहेब सतगुरु देव की जय Kabir Is God- सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। -गरीबदास जी और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।। -दादु दयाल जी वाणी अरबो खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार। करता पुरुष कबीर, रहै नाभे विचार।। -नाभादास जी साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल। ज्ञान गम्या से देदीया, कहै रैदास दयाल॥ -रैदास जी नौ नाथ चौरसी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान। अवीचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥ -गोरखनाथ जी खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥ काइम दिइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥ सयदे (सजदे) करे खुदाई नू आलम बडा कबीर॥ -नानक जी बाजा बाजा रहितका, परा नगरमे शोर। सतगुरू खसम कबीर है, नजर न आवै और॥ -धर्मदास जी सन्त अनेक सन्सार मे, सतगुरू सत्य कबीर। जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥ -जगजीवन जी तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश। कहै रामानन्द निज ब्रह्म तुम, हमरा दुढ विश्वास।। -रामानन्द जी कबीर इस संसार को, समझांऊ के बार । पूंछ जो पकङे भेड़ की, उतरया चाहे पार ॥ -कबीर साहेब** सत् साहेब..
पाखण्ड का अन्त
मीडिया कितना सच बोलता है
शनिवार, 16 अप्रैल 2016
बिना गुरु के मोक्ष संभव नहीं
माता के नवरात्रि
माता की नवरात्रि
,,, जी हाँ पूरे भारत में माता के नवरात्रों का दौर चल रहा है और भोला भला समाज व्रत और जागरण करवा कर अपने उद्धार की सोच रहा हैं पर आप को एक बात बता दें कि इस तरह से आपका उद्धार हो या ना हो पर नकली पुजारियों , पांडो का उद्धार जरूर है, शायद आपको बुरा लगे पर एक बार पोस्ट को पूरा पढ़ लें फिर विचार करें I
,,, हमारे कल्याण का मार्ग हमारे धर्म ग्रंथो और शास्त्रों में लिखा है और गीता जी के अध्याय न. 16 के श्लोक 23 में सपष्ट लिखा हैं कि अर्जुन शास्त्र विधि को त्याग कर जो लोग मनमाना आचरण करते हैं उन्हें कोई लाभ नहीं होता और विचार करने की बात भी हैं कि इन पुजारियों द्वारा प्राचीन काल से ही नवरात्रे और ना जाने कौन कौन से व्रत रखवाएं जा रहे हैं पर ना तो मेरे भारत देश में उन्नति हुयी हैं और ना गरीब का भला हुआ हैं बल्कि और भी ज्यादा पतन हो गया है I
, आप सभी अपने आप को पढ़ा लिखा मानते हो बाजार से सब्जी भी लाते हो तो विचार करते हो कि ये खराब न हो तो फिर भगती मार्ग में इतनी सुस्ती क्यूँ कोई जैसा कह देता है कर देते हो विचार करने वाली बात है हमारे पवित्र ग्रन्थ गीता में अर्जुन को श्री कृष्ण जी कहते हैं कि :
,,,, अर्जुन न तो ज्यादा खाने वाले का और न ही बिलकुल न खाने वाले का , और न ज्यादा सोने वाले का और नही ज्यादा जागने वाले का ये योग सफल होता हैं तो फिर व्रत किस लिए I
,,,, एक बात और नवरात्रे तो 9 दिन के होते हैं पर साल में 365 दिन होते हैं बाकी के दिन वो माँ को कैसे मनाते हो और यहाँ तक कि कुछ मुर्ख तो ऐसे हैं सारा साल शराब पीते हैं और इन दिनों में अपने आप को महा ज्ञानी समझ बैठते हैं ये कोई बात हैं I
,,, नानक जी ने गुरु ग्रन्थ साहेब में लिखा हैं कि
रखे व्रत ते छोड़े अन्न , ना ओह सुहागन न ओह रन्न II
यानी व्रत रखने वाले और अन्न छोड़ने वाले पाखंडी हैं उन्हें भगवान् से क्या लेना
,,,, यहाँ तक कि महात्मा वुद्ध जैसे महापुरुषों ने बारह साल तक व्रत रखा और अंत में एक ही बात बोली :
STARVATION COULD NOT LEAD TO SALVATION
भूखा मरने से उद्धार नहीं होता I
इसलिए मैं अपने पढ़े लिखे भाई बहनों से उम्मीद करता हूँ कि वो इस विषय में सोचे अपने ग्रंथो को पढ़े अगर आप वास्तव में शिक्षित है तो सोचें और अगर नहीं हैं तो किसी पढ़े लिखे से पूछ लें I
सत साहेब II
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