गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

पूजा के योग्य कौन है? Method of worship


पुण्यात्माओं भक्ति की शुरूवात करने से पहले हमें ये जांच लेना चाहिये की हम जिस को भगवान् मानकर पूज रहे है क्या वो वास्तव में भगवान् है और हमें वे सारे सुख दे सकता है जो हमें चाहिए। 1. जब रामचंद्र जी का राज्य सुख भोगने का समय आया तो उनको स्वयं को 14 वर्ष का वनवाश हो गया। गर्मी सर्दी सहनी पड़ी खाने को समय पर खाना नहीं मिलता था। रहने को टूटी हुई से झोपड़ी बनानी पड़ी जंगली जानवरो का सदा भय बना रहता था। आदि। सोचे........जब रामचंद्र जी स्वयं राज का सुख नहीं भोग सके तो आपजी को कहा से सुख दे सकते है। 2. वनवास में जाते वक़्त उनके माता पिता दशरथ जी व् कौशल्या जी उनको जाने के लिए मना कर रहे थे। लेकिन माता पिता की आज्ञा ना मानकर वे जबरन जंगल में चल दिए और पीछे से उनके पिता का निधन हो गया और माता जी लगभग पागल सी हो गई थी। सोचे.......... रामचंद्र जी बचपन में 4 साल से लेकर 18 वर्ष तक तो सृष्टिकर्ता वाल्मीकि जी के आश्रम में बाण विधा सिखने गए और वहीँ रहे। उसके उपरान्त घर आये तो 14 वर्ष का वनवाश हो गया। वनवास से वापस आये तो उससे पहले बाप की मौत हो चुकी थी व् माता आधी पागल हो चुकी थी। अर्थात जब रामचंद्र जी अपने माता पिता का सुख नहीं भोग सके तो उनकी भक्ति से हमें कैसे माँ बाप का सुख हो सकता है 3......... वनवास के दौरान सीता जी को रावण उठा ले गया अर्थात भगवान् की औरत को एक आदमी उठा ले गया (रावण केवल लंका देश जा एक राजा था और रामचंद्र जी भगवान् विष्णु के अवतार अर्थात स्वयं भगवान्) सीता 10 साल तक भूखी प्यासी रावण से नौ लखाबाग में रही उसके बाद युध्द करके सीता को अयोध्या लाये तो 1 साल बाद एक धोभी के कहने से गर्भवती सीता को जंगल में निकाल दिया और सीता आजीवन जंगल में ही रही। सोचे......... रामचंद्र जी स्वयं पत्नी का सुख नहीं भोग पाये तो उनकी भक्ति से हमें कैसे पत्नी सुख मिल सकता है। 4............ 14 वर्ष के वनवास के समय अपने 2 भाईओ भरत व् शत्रुधन से दूर रहे। और जंगल में ही सीता जी ने लव व् कुश नामक दो बच्चों को जन्म दिया जो आजीवन जंगल में ही उनसे दूर रहे कभी अयोध्या में नहीं आये। सोचे........ रामचंद्र जी स्वयं अपने भाईओ व् पुत्रो का सुख नहीं भोग सके और ना उनको सुख दे सके हो हमें क्या दे सकते है 5......... लंका से सीता को लाते वक़्त राम को सीता के चरित्र पर शंका हुई और सीता को सबके सामने अग्नि परीक्षा देने को कहा । सीता ने अग्नि परीक्षा दी और पवित्र साबित हुई उसके बाद राम ने उसको अपनाया और फिर एक धोबी के कहने मात्र से घर से निकाल दिया। सोचे...... रामचंद्र जी ने अग्नि परीक्षा लेने के बाद भी अपनी पत्नी पर विश्वास नहीं किया। वे 2 रुपए की पांच अगरबत्ती जलाने मात्र से आप और हम पर कैसे विश्वास कर लेंगे। 6......... सीता जी को रावण की कैद से छुड़वाने के लिए राम रावण युध्द में 18 करोड़ सेना का कत्ले आम हुवा था (इतिहास गवाह है) जिसमे सुग्रीव की वानर सेना व् जामवंत की भालू सेना से लेकर भील व् आदिवासी आदि शामिल थे। सोचे......... राम रावण युध्द कोई धार्मिक व् सीमाओ का युध्द नहीं था की जिसमे इतनी सेना मरवाई जाये। अगर भगवान् थे तो अपनी पत्नी को स्वयं छुड़वाकर लाते जिस सीता को छुड़वाने के लिये 18 करोड़ औरतो को विधवा बना दिया दिया करोडो बच्चों को यतीम बना दिया अंत में उसी सीता को जंगल में धक्के खाने के लिए छोड़ दिया। अगर सीता को वापस जंगल में ही छोड़ना था तो क्यों 18 करोड़ सेना का नाश करवाया वो रावण की जेल में ही ठीक थी जहा समय पर खाना तो मिल रहा था। 7......... बाली और सुग्रीव दोनों भाइयो का आपस का सम्पति का विवाद चल रहा था रामचंद्र जी ने धोखे से पेड़ की औट लेकर बाली को बाण से मारा और सुग्रीव को राज गद्दी पर बैठाया। क्यों। सोचे....... बाली को एक वरदान मिला हुवा था यदि कोई आपके सामने होकर युध्द करेगा तो उसकी आधी शक्ति आपके अंदर आ जायेगी और आपको कभी जीत नहीं पायेगा। रामचंद्र को इस बात का डर था की मेरी आधी शक्ति बाली में जायेगी और मै हार जाऊंगा इस लिए धोखे से बाण मार।। बताये बाली भगवान् हुवा या रामचंद्र भगवान् हुवा। सोचे..... हम रामचंद्र जी को मर्यादा पुरषोतम कहते है । एक व्यक्ति को धोखे से पेड़ की औट लेकर मारना कहा की मर्यादा है। सोचे...... सीता जैसी पवित्र औरत को एक धोबी के कहने से घर से निकालना कहा की मर्यादा है। क्या आज आप ऐसा कर सकते है। भगवान् होकर एक औरत के लिए 18 करोड़ औरतो को विधवा बना दिया उनके बच्चों को यतीम बना दिया ये कहा की मर्यादा है। सोचे....... माता पिता के रो रो कर मना करने पर की बेटा वनवास में मत जाओ लेकिन उनकी एक ना सुनना ये कहा की मर्यादा है। सोचे........ सीता के जिद्द कर लेने पर की मुझे ये मृग जिन्दा या मुर्दा लाकर दो। भगवान् होकर उस मासूम व् लाचार पशु को मारने के लिए निकल पड़ा ये कहा की मर्यादा है। सोचे....... रामचंद्र जी द्वारा अश्मेघ में छोड़े गए घोड़े को जब लव व् कुश ने पकड़ लिया तो पूरी अयोध्या की सेना लेकर उन माशूम बच्चों को मारने के लिए निकल पड़ना कहा की मर्यादा है। सोचे..... जब लव व् कुश ने रामचंद्र सहित पूरी सेना को युध्द में हरा दिया टी अपनी हार की शर्मींदगी से वापस अयोध्या ना क जाकर सरयू नदी में राम और लक्ष्मण कूद कर आत्म हत्या कर ली। (इतिहास गवाह है ) सोचे...... आज ये पैसो के लालची नकली पंडित व् गुरु कह देते है रामचंद्र जी ने सरयू नदी में जीवित समाधि लेली और कथा का समापन कर देते है। अरे पैसे के लालची मूर्खो उल्टी सीधी कथा कहानी सुनाकर लोगो को पागल बनाकर अपना पेट भरने वाले मूर्खो अगर जीवित समाधी लेना इतना आशान है तो आप भी लीजिये जीवित समाधी क्योंकि आप रामचंद्र के भक्त हो तो आपको भी उनका ही अनुसरण करना चाहिए और अंत में किसी नदी या गंगा जी में या जमीन में खडडा खोदकर रामचंद्र जी की तरह जीवित समाधी लेनी चाहिए तभी तो आपका मोक्ष होगा।क्योंकि आपके भगवान् का भी तो इसी तरह हुवा था। दोस्तों पहले हमारे पूर्वज अशिक्षित थे और पढ़ने का ठेका केवल इन ब्राह्मणों ने ही ले रखा था। इन्होंने हमारे सद् ग्रंथो को जैसा आधा अधूरा समझा वैसा हमारे अनपढ़ पूर्वजो को सुना कर दान दक्षिणा लेकर अपना पेट पालते थे। लेकिन अब इनकी पोल खुलने लगी है आज हर आदमी शिक्षित हो रहा है अपने सद् ग्रंथो की सच्चाई व् उनमे वास्तव में क्या ज्ञान छुपा है पढ़ व् समझ रहा है। अब शिक्षित समाज इनके पाखंड व् आडम्बरो में नहीं आने वाला है। विशेष। आज हम किस ख़ुशी में दीवाली मनाये। 😔😔😔😔😔😔😔 ? क्या सीता ने कभी दीवाली मनाई ? क्या राम ने कभी दीवाली मनाई ? क्या उनके माता पिता ने कभी दीवाली मनाई ? क्या उनके खानदान में किसी ने दीवाली मनाई 😄😄😄😄😄😄😄😄😄 जरा सोचे क्या हम वास्तव में उस परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ रचना मानव है मानव वो है जिसमे मानवता हो दया प्रेम हो लेकिन आज के दिन। हम हजारो के पटाखे फोड़ते समय आनंद का अनुभव करते है और किसी जरूरत मंद के मदद मांगने पर कहते है अभी हाथ टाइट चल रहा है सारे नियम कायदे कानूनों को टाक में रखकर पर्यावरण की ऐसी की तैसी कर देंगे। और पर्यावरण दिवस पर हरे हरे पोधो के बैनर हाथ में लेकर सड़को पर लोगो को सन्देश देते फिरते है आज लोगो के घर घर जाकर गले मिलते है प्यार प्रेम से रहने के वादे करते है। और अगले ही दिन सड़को पर जरा से साइड की बात को लेकर हाथा पाई करते है। लक्ष्मी की फ़ोटो खरीद कर पूजा करते है धन सम्पदा के लिए। अगले ही दिन उस लक्ष्मी (25 रुपए) को बेच देते है ठेके वाले को दारु के एक पव्वे के लिए। 🙈आज का दिन पैसे वालो के लिए दीवाली और गरीब के लिए दिवाला है🙈

56 करोड़ यादव कटकर मर गये


" श्री कृष्ण जी के समक्ष सभी यादव आपस में लड़कर मर गए थे जो कुछ बचे थे,उनको स्वयं श्री कृष्ण जी ने मूसलों से मर डाले। (प्रमाण:-विष्णु पुराण अ.37 पांचवा अंश पृष्ठ 409 से 414 तक) एक मछियारे शिकारी ने श्रीकृष्ण जी के पैर के तलुए में विषाक्त तीर मारकर वध किया। श्रीकृष्ण जी के शरीर का द्वारिका से बाहर वहीँ पर अंतिम संस्कार किया था ।उनके शरीर को गड्ढा खोदकर पांडवों ने दबाया था। उस स्थान पर वर्तमान में श्री द्वारकाधीश का मंदिर बना है । कुछ समय बाद श्रद्धालु उस यादगार को देखने जाने लगे।फिर वहां पर पूजा प्रारंभ हो गई । वि.स 1505 (सन 1448) में कबीर परमेश्वर जी द्वारिका में गए।समुद्र के किनारे जहाँ गोमती नदी सागर में आकर मिलती है,उसके पास एक बालू रेत के टीले(कोठा)पर अर्थात मिट्टी के ढेर पर बैठकर तीर्थ भ्रमण पर आने वाले श्रद्धालुओं को तत्व ज्ञान सुनाया करते थे । परमेश्वर कबीर जी प्रश्न करते थे कि आप किसलिए आए हैं ? उत्तर होता था कि > द्वारिकाधीश के दर्शन करने आए है।उनकी नगरी को देखने आए है।भगवान के आशीर्वाद लेने आए है । परमेश्वर कबीर जी कहा करते:- एक वैध था और वह नब्ज पकड़ कर रोग जान लेता था।ओषधि देकर स्वस्थ कर देता था। उसकी मृत्यु के उपरांत वैध के शरीर को जमीन में दबा कर अंतिम संस्कार कर दिया।उस स्थान पर एक मंदिर बनाकर यादगार बना दी।यदि वैध की मूर्ती से कोई उपचार के लिए प्रार्थना करे तो क्या होगा ? श्रोताओं का एक सुर में उत्तर :- मूर्ति वैध वाला कार्य थोड़े ही करेगी । प्रश्न :- परमेश्वर प्रश्न करते थे तो उस व्यक्ति को क्या करना चाहिए ? उत्तर श्रोताओं का :- किसी जीवित वैध के पास जाकर अपनी जीवन रक्षा करनी चाहिए, यही उचित है । परमेश्वर कबीर जी कहा करते थे कि हे भोले श्रद्धालुओ!आप इस श्री कृष्ण त्रिलोकी नाथ की मूर्ति से क्या मांगने आये हो ? क्या यह श्री कृष्ण जी की मूर्ति आप का कल्याण कर सकती है ? उत्तर :- कुछ आश्चर्य करते कुछ कहते कि हम गलत कर रहे है । कुछ नाराज होकर उठ जाते । परमात्मा कबीर जी कहा करते थे कि आप द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण की मूर्ति के दर्शन से कल्याण की अपेक्षा कर के आए हो।यहाँ पर श्री कृष्ण का ही सर्वनाश हो गया।आपको क्या प्राप्ति होगी? आत्म कल्याण तथा सांसारिक सुख प्राप्त करना है तो में आप जी को वह शास्त्रानुकूल भक्ति बताऊंगा जिससे आप का कल्याण संभव है । इस प्रकार सत्य की समजकर भ्रमें हुए श्रद्धालुओ को यथार्थ भक्ति प्राप्त हुई । गरीबदास जी महाराज जी ने अपनी अमृतवाणी में कहा है कि:- "मेले ठेले जाइयो , मेले बड़ा मिलाप । पत्थर पानी पूजते, कोई साधू संत मिल जात।। जहाँ बैठ कर परमेश्वर कबीर जी सदोपदेश किया करते थे । उस स्थान पर एक गोलाकार चबूतरा (कोठा) बना रखा है । कहा जाता है कि आज तक सन 1448 से सन 2015 (567) तक उस बालू रेत के टीले (कोठे = चबूतरें नुमा गोल चक्र ) को समुद्र की लहरें ने छुवा भी नहीं। समुद्र में ज्वार भाता आता है । तब भी समुद्र की लहरें उस ओर नहीं जाती । यह कबीर कोठा द्वारिकाधिश के मंदिर के बगल में है ।

कबीर वाणी


सत् साहेब सतगुरु देव की जय Kabir Is God- सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारों युग प्रवान। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान।। -गरीबदास जी और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।। -दादु दयाल जी वाणी अरबो खरवो, ग्रन्थ कोटी हजार। करता पुरुष कबीर, रहै नाभे विचार।। -नाभादास जी साहेब कबीर समर्थ है, आदी अन्त सर्व काल। ज्ञान गम्या से देदीया, कहै रैदास दयाल॥ -रैदास जी नौ नाथ चौरसी सिद्धा, इनका अन्धा ज्ञान। अवीचल ज्ञान कबीर का, यो गति विरला जान॥ -गोरखनाथ जी खालक आदम सिरजिआ आलम बडा कबीर॥ काइम दिइम कुदरती सिर पीरा दे पीर॥ सयदे (सजदे) करे खुदाई नू आलम बडा कबीर॥ -नानक जी बाजा बाजा रहितका, परा नगरमे शोर। सतगुरू खसम कबीर है, नजर न आवै और॥ -धर्मदास जी सन्त अनेक सन्सार मे, सतगुरू सत्य कबीर। जगजीवन आप कहत है, सुरती निरती के तीर॥ -जगजीवन जी तुम स्वामी मै बाल बुद्धि, भर्म कर्म किये नाश। कहै रामानन्द निज ब्रह्म तुम, हमरा दुढ विश्वास।। -रामानन्द जी कबीर इस संसार को, समझांऊ के बार । पूंछ जो पकङे भेड़ की, उतरया चाहे पार ॥ -कबीर साहेब** सत् साहेब..

संत रामपाल जी पर लगे आरोप बेबुनियाद

हिम्मत है तो मेरे गुरु पर लगे आरोप सिद्ध करके दिखाओ हिम्मत है तो मेरे परमेश्वर द्वारा दिए ज्ञान को गलत साबित करके दिखाओ अरे मूर्खों :- समझो दिमाग का प्रयोग करो पूरे ब्रह्माण्ड के धर्म गुरुओं को ललकारने वाला सभी धर्मों के गर्न्थो को खोलकर संगत को शिक्षित करने वाला प्रमाण सहित धर्मगुरुओं को गलत साबित करने वाला छाती ठोक कर अपने आप को परमेश्वर का दूत्त कहने वाले को कोई जेल में कैसे बन्द कर सकता है ? या तो कोई कारण है जिसे ना तुम समझ पाये और ना ज्योति निरंजन जब जगत गुरु जेल से बाहर आएंगे तुम भी पछताओगे और तुम्हारा आका भी रोहतक वाली जिस जेल में सन्त रहा वहां से जेल को ही ट्रांसफर करना पड़ा आज वहां पार्क है । फिर हिसार वाली जेल भी कहाँ रह पावेगी ? खट्टर फटर की तो विसात ही क्या ? हमारी लड़ाई ज्योति निरंजन भगवान से हैं मेरी लड़ाई अज्ञान से है और आखिर जीत मेरी है मेरी संगत की है। सत साहेब

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

भवसागर के पक्षी। There are three types of whirlpool bird.


🙏🌹सत साहिब जी🌹🙏 भौसागर के पक्षी तीन प्रकार के होते है, जो कि इस प्रकार है| जगत के पक्षी 👉 ये हमेशा आकाश मे ही उडते रहते है और इनको किसी बात की चिंता और भगवान से डर नही होता है | कहावत है कि अपनी खाल मे मस्त रहते है| पर इनको ज्ञान नही है कि यहा का बाजीगर(काल) एक दिन पंख काट देगा| इनका जीवन उद्देश्य बकवास करना और मौज मस्ती मारना होता है| जगत&भगत पक्षी👉 ये सबसे अजीब पक्षी होते है भौसागर के जो कि आकाश से गिरते है खजुर मे आकर अटक जाते है| हमेशा यही सोच मे रहते है कि आकाश मे वापस जाऊ या धरती पर जाऊ| कहावत है कि धोबी का कुत्ता ना घर का ना घाट का| दिलचस्प बात यह है कि इनका उद्देश्य ही नही होता है, खजुर पर जो बैठता है वो कभी आकाश की ओर देखता है तो कभी धरती की ओर | फिर ये भी पंख कटवा लेते है बाजीगर से| भगत पक्षी👉 ये बहुत ही अच्छे पक्षी होते है जो अपनी औकात से परिचत हो जाते है| क्योकि इनको ज्ञान हो चुका होता है कि दाना-पानी धरती पर ही मिलेगा| ना तो खजुर पर अटकने से मिलेगा और ना ही आकाश मे उडने से | इनका उद्देश्य बाजीगर के ही पंख काटकर(काल के जाल) अपने घर(सतलोक) मे जाना होता है| 🙏🌹जय बंदीछोड की🌹🙏

आज हम 21 वीं सदी में जी रहें हैं।


दोस्तों आज हम 21वीं सदी में जी रहे हैं आज आप शिक्षित हैं और आज आपको कोई मूर्ख नहीं बना सकता इसलिए दोस्तों स्वयं परखने की ज़रूरत है क्या सही है और क्या गलत बेहतर यही होगा और हमारा निष्पक्ष भाव होना चाहिए दोस्तों पहली बात तो बिना गुरु के भक्ति हो ही नहीं सकती और दूसरी बात इस धरती पर 100 गुरु में से 99 तो नकली, झूठे, और पाखंडी है क्योंकि इन सब का ज्ञान हमने शास्त्रों के मापदंड से मापकर देखा है और आप भी देखना चाहे देख सकते हैं निष्पक्ष भाव से, दोस्तों इस धरती पर कोई पूर्ण संत है तो वह संत रामपाल जी महाराज हैं क्योंकि उनकी बताई गई साधना शास्त्रविधि अनुसार है और 100% authentic और लाभकारी भी, बाकी सारे धर्म गुरुओं की साधना शास्त्रविरुद्ध है मित्रों यहां आपको स्वयं परखने की जरूरत है क्योंकि आज तक हम दूसरे के बहकावे में आकर मूर्ख बनते रहे। श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 16 श्लोक 23 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है, हे अर्जुन जो पुरुष शास्त्रविधि को त्याग कर मनमाना आचरण करता है मनमानी पूजाऐं करता है उसको ना सुख न तो सिद्धि और ना ही परम गति ही प्राप्त होती है इसलिए हे अर्जुन कर्तव्य और आकर्तव्य की व्यवस्था में शास्त्र ही प्रमाण है इसलिए शास्त्र विधि अनुसार साधना करनी चाहिए

क्या आपको विज्ञान में रूचि है?


सृष्टी के सबसे बड़े वैज्ञानिक : कबीर साहेब जी ________________________________ क्या आपको विज्ञान में रूचि है? ________________________________आम आदमी की विज्ञान में रूचि हो या ना हो, लेकिन वह भी वैज्ञानिक खोजों के प्रति काफी उत्सुक रहता है. हम जिन वैज्ञानिकों या खोजों के बारे में जानते है, वह मात्र हमारे एक बह्माण्ड के आस-पास ही केन्द्रित है. लेकिन क्या आपको मालूम है...,हम जिस ब्रह्माण्ड में रहते हैं, ऐसे पूरे 21 ब्रह्माण्ड मौजूद हैं और इन 21 ब्रह्माण्डों में हमारे ब्रह्माण्ड के जैसे ही रचना मौजूद है. वहाँ भी हमारे जैसे मनुष्यों का वास है. नदी है...पहाड़ है...झरने हैं...जानवर हैं...पक्षी हैं...सब कुछ है, जो भी हमारे ब्रह्माण्ड में मौजूद है. कबीर जी के दोहे हम बड़े चाव से पढ़ते है और तारीफ भी करते है.....लेकिन क्या कभी हमने इस ओर ध्यान दिया की उन्होंने असंख्य ब्रह्माण्डों के बारे में विस्तृत जानकारी दी है. ....तो चलिये चलते हैं, उस अनंत ज्ञान की ओर, जो कबीर जी हमारे लिये छोड़ गये हैं... चलिये समझते हैं कबीर जी के उस ज्ञान को जो वर्षो से किताबों में बंद है. उस ज्ञान को बाँटा जा रहा है सतगुरू रामपाल जी महाराज के द्वारा______ जन-जन के लिये उपलब्ध ज्ञान______ इस अमृत ज्ञान की वर्षा में भींगकर आप भी तृप्त हो जायेंगे________________ *****कबीर परमेश्वर का ज्ञान : आपके लिये, आपके घर तक***** (देखना ना भलें साधना चैनल पर रोज शाम 7:40 बजे कबीर जी की अनमोल वाणियों का सार-संदेश) ///पूर्णब्रह्म सतगुरू रामपाल जी महाराज की जय/// ######सत साहेब#####

गायत्री मंत्र की सच्चाई


#गायत्री मंत्र हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध मंत्रों में से एक है। माना जाता है की ये मंत्र #तैत्तिरीय #आरण्यक नामक ग्रन्थ से लिया गया है, और यही वो ग्रन्थ है जिसमें इस मंत्र का गलत वर्णन किया गया है। जबकि वास्तविक सही मंत्र यजुर्वेद में वर्णित है, और इसके सामने #ॐ नहीं है। इस मंत्र में "ॐ" का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं है। वास्तव में "ॐ" लगाने से ये मंत्र उनुपयोगी हो जाता है। वास्तविक मंत्र - "#यजुर्वेद अध्याय 36 मंत्र 3" #भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि, धीयो यो न: प्रचोदयात्॥ अर्थ - वेद ज्ञान दाता ब्रह्म कह रहा है की (स्व:) अपने निज सुखमय (भुव:) अंतरिक्ष अर्थात सतलोक में (भू:) स्वयं प्रकट होने वाला पूर्ण परमात्मा है। वही (सवितु:) सर्व सुख दायक सर्व का उत्पन्न करने वाला #परमात्मा है। (तत्) उस परोक्ष अर्थात अव्यक्त साकार (वरेण्यम) सर्वश्रेष्ठ (भर्ग:) तेजोमय शरीर युक्त सर्व सृष्टि रचनहार (देवस्य) परमेश्वर की (धीमही) प्रार्थना, उपासना, #शास्त्रानुकूल विधि से करें, (य:) जो परमात्मा सर्व का पालन करता है, वह (न:) हम को भ्रम रहित (धीय:) शास्त्रानुकूल सत्य भक्ति, बुद्धिमता अर्थात सदभाव से करने की (प्रचोदयात) प्रेरणा करे। पवित्र #गीता के अध्याय 8 श्लोक 13 के अनुसार "#ॐ" मंत्र केवल "ब्रह्म" की प्राप्ति का मंत्र है, और हम जानते हैं की वेदों में "परम अक्षर ब्रह्म" अर्थात "पूर्ण परमात्मा" की महिमा का वर्णन किया गया है । यजुर्वेद के इस मंत्र में भी सर्व शक्तिमान, पूर्ण ब्रह्म #कबीर परमेश्वर की प्रशंसा की गयी है, इसलिए इसके आगे ब्रह्म का मंत्र(ॐ) लगाना ऐसा है, जैसे "प्रधान मंत्री" को "मुख्य मंत्री" कह कर उनका अपमान करना। सत साहेब

मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

गुरू का आदेश सर्वोपरि है।


कागभुसंड जी अपने पूर्व जन्म की कथा गरूड़ देव को सुनाते हुए बताते हैं- एक बार जब वे कथा कर रहे थे तब उनके गुरूजी उनके सामने से चले गए पर कागभुसंड जी ने अभिमानवश खडे होकर गुरूदेव का अभिनंदन नहीं किया। इस पर उनके इष्ट देव शिव जी को इतना क्रोध आया कि उन्होने आकाशवाणी कर कागभुसंड जी को एक साल तक नरक भोगने का श्राप दे दिया। ये भविष्यवाणी गुरूदेव ने भी सुनी। फिर उन्होने शिव जी से श्राप वापिस लेने के लिए मिन्नतें की। गुरूजी की प्रार्थनाओं से प्रसन्न होकर शिवजी ने कहा कि कागभुसंड जी को एक साल तक नरक में रहने का श्राप तो भोगना ही पडेगा परन्तु मेरी कृपा से वहां यमदूत उन्हें तंग नहीं करेंगे। ऐसा ही हुआ। इष्टदेव यह देखते हैं कि मेरे प्रतिनिधि संत के साथ मेरा भक्त कैसा व्यवहार करेगा। अगर इस संत की जगह मैं होता तो मेरे साथ भी इसका व्यवहार ऐसा ही रहता। इस तरह वह व्यक्ति जो गुरू का आदर नही करता, भगवान के दरबार से रीजेक्ट कर दिया जाता है। #कबीर_परमात्मा_कहते_हैं- गुरू गोविन्द कर जानिए, रहिए शब्द समाए। मिले तो दण्डवत बंदगी, नहीं तो पल पल ध्यान लगाए। जय बन्दीछोड की। सत साहेब जी।

सोमवार, 18 अप्रैल 2016

एक संत ऐसा


एक प्रसिद्ध संत थे जिन की प्रसिद्धि का बोलबाला निरंतर बढ़ता जा रहा था। वे लोगों की बुराई और समाज की दशा को सुधारने का अनमोल कार्य कर रहे थे। उन्होंने सभी धर्म गुरुओं को सादर आमंत्रित किया अपने साथ ज्ञान चर्चा करने के लिए ताकि सभी मिलकर एक परमात्मा को पा सके और यथार्थ भक्ति विधि अपना सकेँ। परन्तु उन नकली धर्म गुरुओं को यह मंजूर नहीं था। उन्हें परमात्मा प्राप्ति की बजाए भक्तों की बढ़ती संख्या ज्यादा अच्छी लगती थी। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई। उस संत को बदनाम करने की योजना। योजना के तहत उस संत को बदनाम किया गया। उन पर मिथ्या आरोप लगाकर जेल में डाल दिया गया। दो साल जेल में रहने के बाद संत बेल पर रिहा हुए। इतने आरोपों के बावजूद उस संत के समर्थक लगातार बढ़ते ही जा रहे थे। उन पर उन झूठे आरोपों का कोई प्रभाव नहीँ पड़ रहा था क्योंकि वह संत व उनके ज्ञान को अच्छी तरह समझ चुके थे। कोर्ट की तारीखें अब भी पड़ती थी। उन संत के केस की सुनवाई करने वाला जज भ्रष्टाचारी निकला। उसने संत से कहा अगर केस फारीक करवाना हो तो 30 लाख रुपए दे दें। इस पर संत ने साफ इनकार कर दिया। संत ने कहा जब मैं अपने शिष्यों को रिश्वत लेने व देने से मना करता हूँ तो मैं स्वयं आप को रिश्वत कैसे दे सकता हूँ। इस पर जज ने कडा रुख करके कहा देख लीजिए आपका आश्रम उठ जाएगा, कलम मेरे हाथ में है। संत ने जवाब दिया कि हम भगवान पर विश्वास करने वाले हैं। हम रिश्वत नहीं देंगे। आपको जो करना हो आप करें। जो भगवान को मंजूर होगा वह हो जाएगा। इस पर बौखलाए जज ने संत की हाजिरी माफी रद्द कर दी। संत ने इस बात के पर्चे छपवा कर सब को बताने की कोशिश की। इस बारे में किताबें तक छपी। संत ने कहा कि इस लालची जज ने जो निर्णय लेना था, वह ये पहले ही ले चुका है अब तारीख पर जाने से कोई फायदा नहीँ। राजा हरिश्चन्द्र ने अपने सत्य की सुरक्षा के लिए अपने राज्य का बलिदान दे दिया......लेकिन अंत मेँ जीत उसी की हुई। हम भी सत मार्ग से पीछे नहीं हटेंगे चाहे अब कुछ भी हो। उस भ्रष्टाचारी जज ने पैसे के लोभ में अंधा होकर उस संत के नोनबेलेबल वारंट जारी कर दिए। संत के समर्थक इस अन्याय को देखकर इसके खिलाफ शांति के प्रदर्शन पर उतर आए। उन्होंने काले कपड़े पहन कर इस भ्रष्टाचारी जज के खिलाफ शान्तिपूर्वक विरोध प्रदर्शन किया तथा हाथ में सफेद झंडे जो शांति का प्रतीक थे लिए हुए थे। जैसा कि सभी जानते है कि मीडिया आग में घी झौंकने का काम करती है। जो मसला आसानी से सुलझाया जा सकता था उसे इन मीडिया कर्मियों ने इतने गलत तरीके से दिखाया कि उस संत को ही सब गलत नजरिए से देखने लगे। जिस भ्रष्ट जज को सजा मिलनी चाहिये थी उसे तो महिमा का पात्र बना दिया गया और जो सतमार्ग पर चला व दूसरों को भी सच्चे मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया उन पर संगीन आरोप लगाकर जेल में डाल दिया। परन्तु उस महान संत के अनुयायी समाज को वास्तविकता से परिचित कराने के लिए बहुत प्रयत्न कर रहे हैं। और पूरे देश में शांतिप्रिय रैली धरना करके इस बरवाला केस की CBI जाँच की मांग कर रहे हैं। ताकि सच्चाई सबके सामने आ सके। इस कार्य के लिए आपका भी सहयोग चाहते हैं.......... आपसे करबद्ध प्रार्थना हैं हमारे केस की CBI जाँच की मांग में हमारा सहयोग दें। जो सरकार दहेज को नहीं रोक पाई, जो सरकार नशा नहीं रोक पाई उसको एक संत के महज विचारों ने रोक दिखाया लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों के कारण संत को परेशान किया गया है। संत बिल्कुल निर्दोष हैं। सरकारों व कुछ जजों द्वारा अलोकतान्त्रिक व असंवैधानिक कार्य किया जा रहा है। इस धटना की अधिक जानकारी के लिए विस्तार से पढ़े..."बरवाला की घटना की सच्चाई".....Pdf Download ...Link :-http://www.rsss.co.in/publications/ आप सभी से करबद्ध प्रार्थना है हमारे केस की CBI जाँच की मांग में हमारा सहयोग दें। आप सभी को सत् साहिब!!!

रविवार, 17 अप्रैल 2016

तीन देवों की जो करते भक्ति उनकी कभी न होवै मुक्ति


परमपिता परमात्मा सतगुरु हमें बताते हैं कि:- जब आज से ६०० वर्ष पहले इस कलयुग में स्वयं परमेश्वर कबीर साहेब आए थे तो उन्होने जो तत्व ग्यान हम तुच्छ जीवों को कहा/सुनाया था वह ज्यों की त्यों आज हमारे सभी सदग्रंथ समर्थन कर रहे हैं | परमेश्वर ने कहा था कि भक्ति अगर शास्त्रानुकूल न हो तो वह इस लोक व परलोक दोनो के लिए व्यर्थ है {गीता अ.१६श्लोक २३-२४} और कहा था कि कबीर, तीन देवों की जो करते भक्ति | उनकी कभी न होवै मुक्ति || इस का प्रमाण (गीता अ.७ श्लोक१२-१५) आगे परमेश्वर ने बताया कि:- सब आए उस एक से, डार पात फल फूल | कबीरा पीछे क्या रहा, गही पकड़ा जब मूल || एक साधे सब सधे, सब साधे सब जाय | माली सिंचै मूल को तो, फूलै फलै अघाय || अक्षर पुरुष एक पेंड़ है,क्षर पुरुष वाकी डार | तीनों देवा शाखा हैं, पात रुप संसार || इन सभी पदों का उल्लेख पवित्र सदग्रंथ श्रीमदभगवत गीता अ.१५ श्लोक-१से४ व १६-१७ में ज्यों की त्यों मिलता है | जिससे प्रमाणित होता है कि उस समय जो यह तत्वग्यान परमेश्वर कबीर जी द्वारा बोला गया ऐसा ग्यान बताने वाला कोई संत इस धरा/२१ब्रंहांड में नहीं था क्यों कि इस संसार रुपी उल्टे लटके हूए वृक्ष को जड़ से पत्ते तक की व्याख्या कोई भी संत नही कर सका और गीता अ.१५ श्लोक-१ कहती है कि जो इस उल्टे लटके हूए संसाररुपी वृक्ष के सभी विभागों को तत्व से जानता है वह तत्वदर्शी संत है और गीता अ.४ श्लोक-३४ में गीता ग्यानदाता यह भी कहता है कि उस तत्वग्यान को तू तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर उसके बताए अनुसार भक्ति कर | परमात्मा ने कहा है :- कबीर, बंधे को बंधा मिला, छूटे कौन उपाय | कर सेवा निरबंध की, वो पल में लेय छुड़ाय || वो तो स्वयं परमात्मा थे, तत्वदर्शी संत थे, निरबंध थे जो हमें सतभक्ति, सतसाधना बताकर यह सिध्द करके दिखाए कि हमें सिर्फ जड़/मूल (पूर्ण परमात्मा) की ही भक्ति साधना करनी चाहिए | वर्तमान में पूरण परमात्मा के उस सत भक्ति शास्त्रानुकूल साधना को बताने वाला इस धरा में केवल एक ही संत है- "जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज" आप वास्तव में परमात्मा / सतभक्ति / सतसाधना / मोक्ष पाना चाहते हैं तो सत्य को परखिए दुनिया की बातों में न आइये स्वयं जॉचिए अगर आप निष्पक्ष भाव व आत्म कल्याण को उद्देश्य रखकर सत्य को ढूँढेंगे तो परमात्मा आपको सत्य तक पहूँचने में मदद करेगा | बार बार ऐसा अवसर नही आता भक्तों पहचान लो इस संत स्वरुप परमात्मा को | इनके तत्वग्यान का उत्तर आज भी इस धरा में किसी संतों के पास नहीं है | इस तत्वग्यान को धारण करो और अपना कल्याण करो, परमात्मा कहते हैं- यह संसार समंझदा नाहीं, कहंदा शाम दोपहरे नूँ | गरीबदास ये वक्त जात है, रोवोगे इस पहरे नूँ || समझा है तो सिर धर पॉव | बहूर नहीं रे ऐसा दॉव || ||∆ सत साहेब ∆||